
आजमगढ़- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी आदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह पूरा मामला 9 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट से शुरू हुआ।
आरोपी भरत कुमार पटेल द्वारा संचालित एक सोशल मीडिया अकाउंट से आदिति यादव के खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक दावे किए गए। पोस्ट में उनके साथ चोरी और आपराधिक गतिविधियों को जोड़ने का प्रयास किया गया और उनकी एक मॉर्फ्ड तस्वीर शेयर की गई, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि खराब करने की कोशिश की गई ।
इस मामले में मुख्य आरोपी भरत कुमार पटेल और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले नागेश्वर सिंह बघेल व विनोद कुमार यादव के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है । उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79, 336 और आईटी अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं
अदिति यादव को निशाना बनाने वाले कथित आपत्तिजनक AI-जनरेटेड पोस्ट के फैलने के बाद, सपा विधायकों ने BJP पर राजनीतिक बातचीत के स्तर में आ रही गिरावट को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आजमगढ़ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
योगी ने कहा, "बेटी, बेटी होती है। हम उस संस्कार में बड़े हुए हैं कि गांव की बेटी सबकी बेटी होती है और गांव की बहन सबकी बहन होती है। हमने कोई भेदभाव नहीं किया है"। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
घटना की निंदा करने के साथ ही, सीएम योगी ने अखिलेश यादव को भी कड़ी चेतावनी दी और उनपर पलटवार किया।उन्होंने कहा, "अखिलेश जी, आप दूसरों को उपदेश देते हैं, तो अपने अनुयायियों और कार्यकर्ताओं को भी समझाइए कि वे अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें"। योगी ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह देखें कि उनके अपने लोग बहनों, बेटियों, बुजुर्गों और दिवंगत लोगों के लिए कैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे (सपा कार्यकर्ता) नहीं मानते हैं, तो "उन्हें हमारे हाथों थमा दीजिए, हम उन्हें अच्छे से समझा देंगे"।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले में दोहरा रुख अपनाया - एक तरफ एक पिता की बेटी के खिलाफ हुए हमले पर त्वरित कानूनी कार्रवाई के आदेश देकर 'बेटी बचाओ' की अपनी छवि को मजबूत किया, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे का इस्तेमाल करते हुए अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर राजनीतिक हमला बोलने से भी नहीं चूके।
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