नई दिल्ली: कुकी-ज़ो काउंसिल (KZC) ने केंद्र सरकार को एक बेहद सख्त चेतावनी दी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि 10 अक्टूबर 2026 तक उनकी प्रशासनिक, मानवीय और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे। इसके साथ ही, काउंसिल ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) पर समुदाय के खिलाफ पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
केजेडसी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) द्वारा थोपी गई आर्थिक नाकेबंदी के कारण कुकी-ज़ो समुदाय को भारी संकट से गुजरना पड़ रहा है। कामजोंग, कांगपोकपी, नोनी और तामेंगलोंग जिलों के कई हिस्सों में भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
संगठन ने कुकी-ज़ो बहुल इलाकों में एनआईए द्वारा चलाए जा रहे अभियानों पर गहरी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि जांच एजेंसी की ये कार्रवाइयां चुनिंदा और असंगत हैं। काउंसिल के अनुसार, निर्दोष नागरिकों को बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के लगातार पूछताछ के लिए तलब किया जा रहा है, जबकि नगा और मैतेई बहुल इलाकों में इस तरह के अभियान न के बराबर दिखाई दे रहे हैं।
हालात की संवेदनशीलता को दर्शाते हुए केजेडसी ने एक और बड़ा ऐलान किया है। काउंसिल ने कहा है कि नगा सशस्त्र समूहों द्वारा कथित तौर पर मारे गए कुकी-ज़ो लोगों के शवों को तब तक नहीं दफनाया जाएगा, जब तक कि इस पूरे मसले का कोई उचित और सर्वमान्य समाधान नहीं निकल जाता।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए संगठन ने मणिपुर में तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन दोबारा लागू करने की पुरजोर मांग की है। अपनी इस मांग के समर्थन में उन्होंने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश करते हुए बताया कि फरवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था, तब किसी भी कुकी-ज़ो नागरिक की जान नहीं गई थी।
केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए केजेडसी ने कहा कि कुकी-ज़ो लोगों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए। हिंसा और अत्याचार के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, संगठन ने कुकी-ज़ो समुदाय के लिए केंद्र शासित प्रदेश जैसी 'अलग प्रशासन' की राजनीतिक मांग पर केंद्र से स्पष्ट अपडेट मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार एक ठोस और स्वीकार्य राजनीतिक समाधान की दिशा में जल्द ही व्यावहारिक कदम उठाएगी।
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