बुजुर्ग की ढाल बनना हो गया गुनाह? 'मोहम्मद दीपक' पर ही FIR, अब उपद्रवी तय करेंगे दुकानों के नाम?

26 जनवरी को बुजुर्ग दुकानदार को बचाने वाले जिम मालिक के खिलाफ FIR; शहर में तनाव और पुलिस छावनी में तब्दील हुआ 'हल्क जिम'।
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कोटद्वार में क्यों है तनाव? बुजुर्ग को बचाने वाले 'हल्क जिम' के मालिक पर FIR क्यों? जानें कैसे 'दीपक' बने 'मोहम्मद दीपक' और वायरल वीडियो का पूरा सच।Pic- Social Media
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर सोमवार को नजारा कुछ अलग था। पुलिस का भारी बल हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ले रहा था। कई बैरिकेड्स और पुलिस की पैनी निगाहों के बीच, कोटद्वार शहर एक छावनी में तब्दील नजर आया। इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र में था 'हल्क जिम', जिसके मालिक दीपक कुमार अब शहर में "मोहम्मद दीपक" के नाम से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

26 जनवरी का वह वाकया जिसने सब बदल दिया

यह पूरा मामला 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) का है। 37 वर्षीय दीपक कुमार ने भीड़ का डटकर सामना किया, जो पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार, वकील अहमद को परेशान कर रही थी। भीड़ का दबाव था कि बुजुर्ग अपनी दुकान के नाम से "बाबा" शब्द हटा दें।

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें दीपक बुजुर्ग के बचाव में खड़े नजर आए। इस वीडियो ने उन्हें रातों-रात सुर्खियों में ला दिया, लेकिन साथ ही विवादों को भी न्योता दे दिया। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब शनिवार को बजरंग दल के कई कार्यकर्ता दीपक का विरोध करने के लिए इकट्ठा हो गए, हालांकि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रोक लिया।

तीन एफआईआर (FIR) और पुलिस की कार्रवाई

सोमवार को दीपक के जिम में प्रवेश पर पुलिस द्वारा रोक लगा दी गई थी। इस मामले में अब तक कुल तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. पहली FIR पीड़ित दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर दर्ज हुई है उन लोगों के खिलाफ जो उन्हें परेशान कर रहे थे। दूसरी FIR कोटद्वार के ही एक निवासी की शिकायत पर दीपक और उनके दोस्त विजय रावत के खिलाफ (विजय भी 26 जनवरी को दीपक के साथ थे और वीडियो में दिखाई दे रहे हैं) दर्ज हुए हैं। और तीसरी FIR पुलिस द्वारा बजरंग दल के अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई है।

"ईश्वर के प्रति जवाबदेह हूं, भीड़ से नहीं डरता"

सोमवार को मीडिया से बात करते हुए दीपक ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैंने अपना नाम मोहम्मद दीपक इसलिए बताया क्योंकि उस वक्त वही करना सही था। मैं केवल ईश्वर के प्रति जवाबदेह हूं। एक ऐसे व्यक्ति के लिए खड़ा होना, जिस पर उसके धर्म के कारण हमला किया जा रहा था, यही इंसानियत थी। मैं इन विरोध प्रदर्शनों से विचलित नहीं हूं।"

दीपक के साथ मौजूद उनके दोस्त और यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजय रावत (38) ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद और भी लोग उनके समर्थन में आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "कोई समूह निजी संपत्ति में घुसकर मालिक से दुकान का नाम बदलने की मांग कैसे कर सकता है?"

परिवार पर संकट और पड़ोसियों की बेरुखी

दीपक के अनुसार, शनिवार को भीड़ सोशल मीडिया पर किए गए एक आह्वान के बाद जुटी थी। दक्षिणपंथी संगठनों ने वीडियो वायरल कर दीपक को "सबक सिखाने" की बात कही थी। दीपक ने बताया कि जब भीड़ ने उनके परिवार के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया, तो वह उनका सामना करने नीचे आए, जिसके बाद पुलिस उन्हें और उनके साथियों को थाने ले गई।

दीपक हैरानी जताते हैं, "हमने वीडियो सबूत दिए और उन लोगों की पहचान भी की जिन्होंने हमें गालियां दीं, फिर भी हमारे खिलाफ ही एफआईआर दर्ज हो गई। यह मेरी समझ से परे है।"

तनाव के इस माहौल का असर दीपक के निजी जीवन पर भी पड़ा है। उनके दो मंजिला घर में उनकी पत्नी, 35 वर्षीय मीनाक्षी बिष्ट ने अपनी पांच साल की बेटी को नानी के घर भेज दिया है। मीनाक्षी कहती हैं, "वह बीमार है और यह सब माहौल उसे और परेशान करता।"

दीपक, जिन्होंने 20 साल पहले एक फिटनेस ट्रेनर के रूप में शुरुआत की थी, आज अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। उनकी पत्नी बताती हैं कि दीपक के दोस्त तो उनके साथ खड़े हैं, लेकिन पड़ोस से कोई भी हाल-चाल पूछने नहीं आया। फिर भी, दीपक को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, "मेरी मां एफआईआर और भीड़ से डरी हुई हैं, लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि मैंने जो किया वह गलत था। मैं एक भारतीय हूं और भारत में सभी को समान अधिकार हैं।"

स्थानीय लोगों की राय और पुलिस की अपील

पौड़ी गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सर्वेश पंवार ने शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया, "जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

हालांकि, शहर में राय बंटी हुई है। दीपक के जिम के सामने दुकान चलाने वाले 75 वर्षीय महेंद्र अग्रवाल का मानना है कि दीपक को अपने काम से काम रखना चाहिए था। उन्होंने कहा, "बजरंग दल की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। उन मामलों में दखल देने की क्या जरूरत थी जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं था?" वहीं, जनरल स्टोर चलाने वाले मनीष घंश्याल ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि मामले को दीपक की टिप्पणियों के बिना ही सुलझाया जाना चाहिए था।

तमाम विरोधों के बावजूद, दीपक अपने इरादों पर अडिग हैं। उनका कहना है, "किसी न किसी को तो बोलना ही होगा। यदि वे एक आवाज़ को दबाएंगे, तो दूसरी उठेगी।"

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