कानपुर रेप कांड: आरोपी दरोगा अब भी फरार, पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियां; केस वापस लेने का दबाव

कानपुर रेप कांड: फरार दरोगा के गुर्गों ने दी केस वापस लेने की धमकी, भाई बोला- 'न्याय मिलने तक लड़ूंगा'
यूपी पुलिस
यूपी पुलिससांकेतिक फोटो
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उत्तर प्रदेश: कानपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) और एक यूट्यूबर द्वारा कथित अपहरण और गैंगरेप की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। घटना के एक हफ्ते से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस अधिकारी गिरफ्त से बाहर है। इस बीच, पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें अब दरोगा के सहयोगियों द्वारा लगातार धमकियां मिल रही हैं।

पीड़िता के 19 वर्षीय भाई, जो इस मामले में शिकायतकर्ता भी हैं, ने अपनी बहन की हालत के बारे में इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से कहा, "इस घटना के बाद से मेरी बहन बुरी तरह डरी हुई है। उसने घर से बाहर निकलना बिल्कुल बंद कर दिया है और वह किसी से बात भी नहीं कर रही है।"

सोशल मीडिया पर चरित्र हनन और धमकियों का दौर

भाई ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष की ओर से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हर दिन सोशल मीडिया पर कोई न कोई वीडियो, पत्र या ऑडियो क्लिप वायरल की जा रही है, जिसमें दावा किया जाता है कि सब-इंस्पेक्टर निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया जा रहा है। पहले हम पर झूठे आरोप लगाकर फंसाने की कोशिश की गई, और जब यह चाल नाकाम रही, तो अब दरोगा अपने गुर्गों के जरिए हमें धमकियां दिलवा रहा है।"

मुख्य आरोपी एसआई अमित कुमार मौर्य अभी भी फरार है। वहीं, दूसरे आरोपी शिव बरन, जो खुद को यूट्यूबर बताता है, उसे पुलिस ने पिछले हफ्ते ही गिरफ्तार कर लिया था।

सीतापुर से एक व्यक्ति हिरासत में

मंगलवार को पीड़िता के भाई ने पुलिस को सूचित किया कि उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया है, जिसमें एसआई का नाम लेने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई और केस से पीछे हटने को कहा गया।

शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कॉल ट्रेस किया, जो पड़ोसी जिले सीतापुर का निकला। पुलिस ने वहां से कथित कॉलर अमित त्रिवेदी (30) को हिरासत में ले लिया है। कानपुर के पुलिस उपायुक्त (DCP) एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया, "हमने त्रिवेदी को पकड़ लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।"

पुलिस के अनुसार, त्रिवेदी छोटे-मोटे काम करता है। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसने परिवार को केवल "समझाने" के लिए फोन किया था कि वे किसी 'अमित' नाम के व्यक्ति को न फंसाएं। पुलिस उसके इस दावे की जांच कर रही है, हालांकि शुरुआती जांच में फरार दरोगा मौर्य और त्रिवेदी के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

क्या हुआ था 5 जनवरी की रात?

यह दिल दहला देने वाली घटना 5 जनवरी की रात को हुई थी। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि वह घर से बाहर शौच के लिए निकली थी, तभी उसे एक काली एसयूवी (SUV) में जबरन खींच लिया गया। गाड़ी के अंदर दो लोग थे, और ड्राइविंग सीट पर बैठा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था।

लड़की के शोर मचाने के बावजूद, वे गाड़ी को रेलवे ट्रैक के पास एक सुनसान इलाके में ले गए। पीड़िता का आरोप है कि वहां दोनों आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया और उसे आधे घंटे से अधिक समय तक गाड़ी में बंधक बनाए रखा। बाद में वे उसे उसी जगह वापस ले आए जहां से उसका अपहरण किया गया था और उसे गाड़ी से बाहर फेंक कर फरार हो गए।

पुलिस की लापरवाही और वायरल वीडियो

भाई ने अपनी शिकायत में बताया कि जब बहन देर शाम तक नहीं लौटी, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। वह आधी रात के करीब घर पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई।

6 जनवरी को जब परिवार ने एफआईआर दर्ज कराई, तो उनका दावा है कि पुलिस ने रिपोर्ट में 'वर्दी वाले व्यक्ति' का जिक्र नहीं किया और न ही पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धाराएं लगाईं। परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) विक्रम सिंह से अपनी चिंता जताई, तो उन्होंने कथित तौर पर अभद्रता की और नाबालिग के चरित्र पर ही सवाल उठाए। भाई का आरोप है कि एसएचओ ने चिल्लाते हुए कहा कि अगर जांच में आरोप सही पाए गए तभी धाराएं जोड़ी जाएंगी।

भाई-बहन ने वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जो वायरल हो गया। इसके बाद ही पुलिस ने संज्ञान लिया और एफआईआर में पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ीं। पुलिस का कहना है कि लापरवाही बरतने पर एसएचओ सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

50 हजार का इनाम घोषित

डीसीपी आबिदी ने जानकारी दी कि 2023 बैच के आरोपी एसआई अमित कुमार मौर्य की गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है और उसे पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से पीड़िता के घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

"न्याय मिलने तक नहीं रुकूंगा"

तमाम दबावों के बावजूद पीड़िता का भाई हार मानने को तैयार नहीं है। तमिलनाडु की एक निजी कंपनी में काम करने वाले भाई को इस केस के कारण अपनी नौकरी से दूर रहना पड़ रहा है।

अपनी पारिवारिक स्थिति बयां करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे पिता लकवाग्रस्त हैं और मां का पिछले साल निधन हो गया था। मेरी बहन हम चार भाई-बहनों में सबसे छोटी है। मैंने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखे हैं... चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि एसआई अमित कुमार को उसके किए की सजा मिले।"

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