
आजमगढ़- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक निहायत शर्मनाक घटना ने समाज के उस क्रूर पक्ष को उजागर कर दिया है, जहां जातिगत भेदभाव और शारीरिक विकलांगता का मजाक उड़ाया जाता है। विवेकानंद हाई स्कूल एंड इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले विकलांग दलित छात्र इंद्रजीत कुमार पर कथित तौर पर रसायन विज्ञान के शिक्षक योगेंद्र ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। मात्र 10 मिनट की देरी के लिए छात्र को न सिर्फ पीटा गया, बल्कि उसके पैर पर खड़े होकर चोट पहुंचाई गई और छत से फेंकने की धमकी भी दी गई। डर के मारे जब छात्र ने टीचर का स्वेटर पकड़ लिया तो शिक्षक ने कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणी करते हुए कहा, "चमार हो के मेरा स्वेटर पकड़ लिये।"
घटना की जानकारी देते हुए छात्र इंद्रजीत ने वीडियो में बताया कि वह साइकिल से स्कूल आते हैं और उनकी लोकोमोटर डिसेबिलिटी (चलने-फिरने में विकलांगता) के कारण थोड़ी देरी हो गई। इंद्रजीत ने दर्द भरी आवाज में कहा, "जैसे ही हम अंदर घुसे, सर ने डांटना शुरू कर दिया। बोले जब हम केमिस्ट्री पढ़ायेंगे, तुम हमारी क्लास में नहीं आओगे, हम बाहर चले गए, लेकिन कुछ लड़के जो लेट आये उनको अंदर जाने दिया। उसके बाद 20-25 स्टूडेंट्स लेट आये तो उन्हें भी प्रवेश दिया"। इसपर इंद्रजीत ने भी अंदर आने देने को जोर दिया तो उसे पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने आगे खुलासा किया कि शिक्षक ने उसके सिर , मुँह और पेट पर मारा, पैर पर चढ़ गए और छत से धक्का देने की कोशिश की। जब छात्र ने स्वेटर पकड़ लिया, तो शिक्षक ने गुस्से में कहा, "चमार जात के होके हमारा स्वेटर पकड़ लिया।" इसके बाद अन्य लड़कों को बुलाकर भी मारपीट की गई।
विकलांगता के बावजूद स्कूल आने का संघर्ष झेल रहे इंद्रजीत ने कहा, "हमारी विकलांगता के कारण देरी हुई, लेकिन हमें सजा क्यों मिली?" पीड़ित छात्र ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन कथित रूप से उसे डांटकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। छात्र ने कहा, "हम शिकायत करने गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमको भगा दिया।"
यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां पत्रकार पीयूष राय ने वीडियो शेयर करते हुए इसे उठाया। पोस्ट को हजारों व्यूज मिल चुके हैं और लोगों ने शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग की है। विपक्षी दलों और दलित संगठनों ने इसे जातिगत अत्याचार करार देते हुए योगी सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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