
उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक अहम निर्देश दिया है। यह मामला पत्रकार सत्यम वर्मा से जुड़ा है, जिन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर राज्य सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का काम किया था, जिसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) जैसी सख्त धाराएं लगाई गई हैं।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिया है कि वे मामले की अगली सुनवाई तक अपना जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) पेश करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख तय की है।
पत्रकार की ओर से दायर की गई याचिका में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि गिरफ्तारी और हिरासत में भेजने की पूरी प्रक्रिया में भारी प्रक्रियात्मक अनियमितताएं बरती गई हैं। इसी आधार पर अदालत से उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई है। इसके साथ ही, याचिका में यह भी गुहार लगाई गई है कि इस हिरासत से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूतों को सुरक्षित रखा जाए।
सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी 17 अप्रैल को राजधानी लखनऊ से हुई थी। इस कार्रवाई के लगभग एक महीने बाद, 13 मई को प्रशासन ने उनके खिलाफ बेहद सख्त माने जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी मामला दर्ज कर लिया।
उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई आगजनी और हिंसा में वर्मा की मुख्य भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग इलाकों में लोगों को उकसाकर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति को भंग करने का प्रयास किया।
यह पूरा विवाद नोएडा में मजदूरों के एक बड़े प्रदर्शन से जुड़ा है। मजदूर अपनी मजदूरी बढ़ाने और काम करने की स्थिति में सुधार की मांग को लेकर लामबंद हुए थे। 13 अप्रैल को इस प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया था। इस दौरान कई जगहों पर गाड़ियों में आग लगाने, जबरन घुसपैठ करने और पथराव की घटनाएं सामने आई थीं। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था। उस दिन पुलिस ने सैकड़ों मजदूरों के साथ-साथ सात अन्य कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया था।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें