अंबेडकर एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (AANA) ने 22 से 25 मई तक लॉरेलविले रिट्रीट सेंटर में अपना वार्षिक तीन-दिवसीय अंबेडकराइट रिट्रीट आयोजित किया। इस दौरान डॉ. बी.आर. आंबेडकर की जयंती, ज्योतिराव फुले जयंती और वैशाख दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।
इस भव्य समारोह में लगभग 250 सदस्यों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमेरिका के 20 राज्यों, कनाडा के ओंटारियो, अल्बर्टा और न्यू ब्रंसविक प्रांतों के साथ-साथ भारत से आए मेहमानों ने भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह वार्षिक रिट्रीट बौद्ध धर्म, समानता, सामाजिक न्याय और डॉ. आंबेडकर व महात्मा फुले की शिक्षाओं पर केंद्रित था। इस आयोजन ने अंबेडकराइट परिवारों, युवाओं और सामुदायिक नेताओं को मानवाधिकारों और समानता के प्रति साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट किया।
कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार शाम को 'मीट एंड ग्रीट' सत्र के साथ हुई। इस दौरान लोगों ने नए दोस्त बनाए और पुराने परिचितों से मुलाकात कर शेष रिट्रीट के लिए अपना उत्साह साझा किया।
शनिवार की सुबह भंते रेवत के नेतृत्व में ध्यान और फिर ज़ुम्बा सत्र के साथ हुई। नाश्ते के बाद भंते रेवत के नेतृत्व में एक विशाल जुलूस निकाला गया। इसके बाद त्रिशरण पंचशील, बुद्ध वंदना और अध्यक्षीय भाषण का आयोजन हुआ।
समारोह में अतिथि वक्ता प्रो. लॉरेंस साइमन ने जाति और सामाजिक न्याय पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर प्रो. अतुल भोसेकर को 'डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल अवार्ड 2026' और स्वाति सावंत को 'सावित्रीमाई फुले इंटरनेशनल अवार्ड 2026' से सम्मानित किया गया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 'अंबेडकराइट पीपल्स वॉयस' को 'मूकनायक एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड 2026' दिया गया। वहीं, भंते गुणरत्न को 'डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026' प्रदान किया गया। जयभीम पुरस्कार समारोह में वयस्कों, युवाओं और बच्चों के स्वयंसेवी योगदान को भी सराहा गया।
दोपहर के भोजन और एक सामूहिक तस्वीर के बाद सांस्कृतिक गतिविधियों का दौर शुरू हुआ। किंडरगार्टन के बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक ने नृत्य, गायन और भाषण के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इससे युवाओं को कार्यक्रम की मेजबानी करने और समुदाय से जुड़ने का शानदार अवसर मिला।
शनिवार शाम को एआई (AI) पर एक ज्ञानवर्धक चर्चा हुई और बच्चों के लिए खेलों का आयोजन किया गया। इस रात का मुख्य आकर्षण 'वैशाख नाइट' रहा, जिसमें एक शासी सिद्धांत के रूप में धम्म और बौद्ध धर्म के उत्थान-पतन व पुनरुत्थान पर चर्चा की गई। कैंडल लाइटिंग सेरेमनी के बाद उम्मीद और एकता के प्रतीक के तौर पर आसमान में जगमगाते गुब्बारे छोड़े गए।
रविवार की शुरुआत ध्यान और ज़ुम्बा के बाद डॉ. आंबेडकर की शिक्षाओं से प्रेरित 'वॉक फॉर इक्वेलिटी' से हुई। दिन भर सभी आयु वर्ग के लोगों ने खेलकूद की इनडोर व आउटडोर गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिससे आपसी तालमेल और टीमवर्क मजबूत हुआ।
रविवार को ही प्रो. लैरी साइमन और एडवोकेट स्वाति सावंत के साथ 90 मिनट का एक विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें न्यूयॉर्क स्टेट एंटी-कास्ट डिस्क्रिमिनेशन बिल (S6531/A6920) और बोस्टन यूनिवर्सिटी द्वारा जाति को संरक्षित श्रेणी में शामिल किए जाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
रिट्रीट की आखिरी रात सभी ने डीजे नाइट में जश्न मनाया। एक फैशन शो के दौरान परिवारों ने रैंप वॉक किया और मंच पर एक साथ तस्वीरें खिंचवाईं। जश्न का यह दौर आधी रात के बाद तक चलता रहा।
सोमवार सुबह अंतिम ध्यान और ज़ुम्बा सत्र का आयोजन हुआ। नाश्ते के बाद सभी उपस्थित लोगों ने अपना सामान पैक किया और अगले साल के रिट्रीट में फिर से मिलने के वादे के साथ एक-दूसरे को भावभीनी विदाई दी।
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