BHU में खुला विदेशी संस्था द्वारा प्रायोजित देश का पहला बौद्ध केंद्र, छात्रों के लिए 10 स्कॉलरशिप का ऐलान

बीएचयू के पाली और बौद्ध अध्ययन विभाग में त्ज़ु ची फाउंडेशन के सहयोग से शुरू हुआ भारत का पहला विदेशी बौद्ध केंद्र, शोधार्थियों के लिए 10 फुल स्कॉलरशिप की भी सौगात।
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BHU में त्ज़ु ची फाउंडेशन के सहयोग से देश का पहला विदेशी बौद्ध अभ्यास केंद्र खुला। छात्रों के लिए 10 फुल स्कॉलरशिप का भी ऐलान।(सांकेतिक तस्वीर)
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उत्तर प्रदेश: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पाली और बौद्ध अध्ययन विभाग में शुक्रवार को 'त्ज़ु ची महायान बौद्ध अभ्यास केंद्र' का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया। यह भारत में किसी विदेशी बौद्ध संगठन द्वारा प्रायोजित अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक बौद्ध केंद्र है। इस खास मौके पर त्ज़ु ची फाउंडेशन ने पाली और बौद्ध अध्ययन के छात्रों के लिए पूरी तरह से वित्त पोषित 10 छात्रवृत्तियों की भी घोषणा की है, जिससे युवा शोधार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

इस नव-स्थापित केंद्र का उद्घाटन बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी और बौद्ध त्ज़ु ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पी यू लिन ने संयुक्त रूप से किया। इस गरिमामयी समारोह में विश्वविद्यालय के कला संकाय की डीन प्रोफेसर सुषमा घिल्डियाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

पाली और बौद्ध अध्ययन विभाग के तत्वावधान में स्थापित इस सेंटर को मुख्य रूप से बौद्ध दर्शन, करुणा, माइंडफुलनेस, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाले एक बेहतरीन मंच के रूप में तैयार किया गया है। बीएचयू के कुलपति ने इस पहल की सराहना की और इसे वैश्विक अकादमिक सहयोग को मजबूत करने तथा बौद्ध विरासत व मूल्यों को सहेजने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह अभ्यास केंद्र आने वाले समय में कई तरह की अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन करेगा। इसके तहत मुख्य रूप से थेरवाद और महायान बौद्ध साहित्य का प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाएं, व्याख्यान श्रृंखलाएं, ध्यान (मेडिटेशन) कार्यक्रम और विद्वानों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से बौद्ध शिक्षाओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पी यू लिन ने 'द सूत्र ऑन इनफिनिट मीनिंग: अ लाइफटाइम ऑफ इनफिनिट धर्म, इनफिनिट गुड- हाउ बुद्धिज्म रिस्पॉन्ड्स टू द सफरिंग एंड डिवीजन इन टुडेज़ वर्ल्ड' विषय पर एक अत्यंत प्रभावशाली व्याख्यान दिया।

उन्होंने अपने संबोधन में विस्तार से समझाया कि कैसे करुणा, प्रेम-दया और मानवीय सेवा पर आधारित बौद्ध शिक्षाएं आज की दुनिया में मौजूद दुखों और विभाजनों को दूर करने में कारगर साबित हो सकती हैं। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सुनने और इसका हिस्सा बनने के लिए सैकड़ों की संख्या में विदेशी छात्र, बौद्ध भिक्षु, शोधार्थी और आम विद्यार्थी मौजूद रहे।

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