हमीरपुर में कुदरत का कहर: बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत

यूपी के हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 3 घायल। सीएम योगी ने दिए जांच के सख्त आदेश, मृतक परिवारों को 5 लाख का मुआवजा और इंजीनियर सस्पेंड।
Hamirpur bridge collapse
यूपी के हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत। CM योगी का सख्त एक्शन, इंजीनियर सस्पेंड और मुआवजे का ऐलान।
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उत्तर प्रदेश: हमीरपुर जिले में शुक्रवार तड़के एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। तेज आंधी-तूफान के बीच बेतवा नदी पर बन रहे एक निर्माणाधीन पुल का कंक्रीट स्लैब अचानक भरभरा कर गिर गया। इस भयानक हादसे में छह मजदूरों की दबकर मौत हो गई है। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और एक सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है।

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दर्दनाक घटना पर गहरा दुख जताते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की त्वरित आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ समन्वय स्थापित कर राहत और बचाव कार्य पूरी तेजी से चलाए जाएं।

यह भीषण हादसा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर लालपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परसानी और कंदौर गांवों के बीच रात करीब 3 बजे हुआ। उस वक्त मजदूर पुल पर काम कर रहे थे, तभी अचानक मौसम बिगड़ा और यह बड़ी त्रासदी घटित हुई।

पुलिस प्रशासन ने मृतकों की पहचान कर ली है। जान गंवाने वालों में बांदा जिले के रहने वाले लोकेंद्र (22), कुलदीप निषाद (19), सावंत यादव (28) और सभाजीत (30) शामिल हैं। इनके अलावा हमीरपुर के ही रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह चौहान (34) और राजेश पाल (42) की भी इस हादसे में जान चली गई है।

मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस और बचाव दलों की कड़ी मेहनत के बाद तीन मजदूरों को भारी मलबे के नीचे से जिंदा बाहर निकाल लिया गया है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

हमीरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अरविंद कुमार वर्मा ने शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि जिस समय यह भारी-भरकम कंक्रीट स्लैब गिरा, उस वक्त सभी पीड़ित मजदूर वहां अपना काम कर रहे थे। स्लैब के अचानक गिरने से उन्हें संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला।

मौसम विभाग (आईएमडी) और जिला प्रशासन ने गुरुवार शाम को ही तेज हवाओं, आंधी और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। विभाग के अनुसार, शुक्रवार तड़के लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज समेत प्रदेश के 20 जिलों में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं और भारी बारिश के साथ तूफान आया, जिसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ा।

इस 800 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य साल 2024 से चल रहा था। इसका मुख्य उद्देश्य हमीरपुर जिले के कुरारा ब्लॉक में स्थित मोरा कंदार और कंदौर गांवों को आपस में जोड़ना है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा एक निजी ठेकेदार के माध्यम से इस पुल का निर्माण कराया जा रहा था।

हादसे के बाद विभागीय स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक (सिविल) मिथिलेश कुमार ने बताया कि इस मामले में सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इसके साथ ही, हमीरपुर में तैनात डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर दिलीप कुमार के खिलाफ विभागीय जांच के सख्त आदेश दिए गए हैं। घटना की तह तक जाने और तकनीकी खामियों का पता लगाने के लिए विभाग ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति का भी गठन किया है। यह विशेष समिति हादसे के सभी कारणों की बारीकी से पड़ताल करेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय तक इस पुल का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। नदी पर सपोर्टिंग पिलर खड़े किए जा चुके थे और पांच कंक्रीट स्लैब भी सफलतापूर्वक रखे जा चुके थे, जिनमें से एक स्लैब शुक्रवार की सुबह भरभरा कर नीचे आ गिरा।

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और जिला प्रशासन के आला अधिकारी खराब मौसम की परवाह किए बिना तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए बाद में एसडीआरएफ की टीमों को भी भारी उपकरणों के साथ बचाव अभियान में लगाया गया, ताकि मलबे को हटाकर हर संभव जान बचाई जा सके।

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