नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय ने कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में एक और शिकायत दर्ज कराई है। यह कदम तब उठाया गया है जब उनकी पहली शिकायत पर लगभग 10 दिनों तक आयोग की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। यह नई शिकायत एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत की गई है।
गुरुवार को धनंजय ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान दलित समुदाय को लेकर कुलपति द्वारा की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में आज भी दलित और अन्य हाशिए के समुदायों से आने वाले छात्रों के खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण माहौल बना हुआ है।
जेएनयू से पीएचडी कर रहे और दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले धनंजय ने बताया कि उन्होंने 25 फरवरी को भी आयोग के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में जेएनयू की वीसी शांतिश्री डी पंडित द्वारा दिए गए भेदभावपूर्ण और जातिवादी बयानों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
5 मार्च को भेजे गए अपने तीन पेज के ईमेल में उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि पहली शिकायत दर्ज किए हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज तक उन्हें किसी भी तरह की कार्रवाई की रिपोर्ट या आयोग की ओर से कोई भी आधिकारिक संवाद प्राप्त नहीं हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पिछली शिकायत की स्थिति रिपोर्ट मांगने के अलावा जल्द जांच के निर्देश देने की भी मांग की है।
उन्होंने कुलपति के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ उन्हें उनके पद से हटाने का भी कड़ा आग्रह किया है।
छात्र नेता के अनुसार, आयोग की इस निष्क्रियता के कारण दलित और हाशिए के समुदायों के छात्रों में लगातार मानसिक पीड़ा और भारी आशंका का माहौल बना हुआ है। यह पूरा विवाद तब गरमाया जब कुलपति द्वारा एक समाचार मंच को दिए गए 52 मिनट लंबे पॉडकास्ट साक्षात्कार के छोटे वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने लगे।
इस विस्तृत साक्षात्कार में वीसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) समानता नियम 2026 पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इस दौरान उन्होंने भारत में दलितों की स्थिति की तुलना अश्वेतों से कर दी। उनका कहना था कि 'विक्टिम कार्ड' खेलना एक तरह के अस्थायी नशे जैसा है और इससे कोई वास्तविक प्रगति नहीं होती है। उनकी इन चौंकाने वाली टिप्पणियों के बाद जेएनयू में कई विरोध प्रदर्शन हुए और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने भी इसकी तीखी आलोचना की।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार, 5 मार्च को जेएनयूटीए ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से शिक्षक संघ ने कुलपति द्वारा जाति और भारतीय समाज में इसकी भूमिका पर की गई विवादित टिप्पणियों को लेकर शिक्षा मंत्रालय और भारत सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
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