नासिक के SC/ST हॉस्टल में 7 बच्चों का यौन शोषण, मामले को छिपाने के आरोप में अधीक्षक पर भी केस दर्ज

नासिक के अनुदानित SC/ST छात्रावास में 7 छोटे बच्चों के यौन शोषण का सनसनीखेज मामला। 7 नाबालिग आरोपी पुलिस की गिरफ्त में, मामले को छिपाने के आरोप में अधीक्षक पर भी एफआईआर दर्ज।
Nashik hostel sexual abuse
नासिक के एक SC/ST छात्रावास में 7 छोटे बच्चों के यौन शोषण का खौफनाक मामला सामने आया है। 7 नाबालिग छात्र गिरफ्तार, अधीक्षक पर भी FIR।(Ai Image)
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महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। नासिक ग्रामीण पुलिस ने एक सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल के सात स्कूली छात्रों को हिरासत में लिया है। इन बड़े छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही हॉस्टल में रहने वाले सात छोटे बच्चों का यौन शोषण किया है।

पकड़े गए सभी आरोपी छात्रों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो - POCSO) एक्ट और एंटी रैगिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को इन सभी को नासिक के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया। इस गंभीर मामले में पुलिस ने हॉस्टल के अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। अधीक्षक पर आरोप है कि उसे पिछले छह-सात महीनों से चल रहे इस घिनौने कृत्य की जानकारी थी, लेकिन उसने पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। फिलहाल, जिला प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से हॉस्टल को बंद करवा दिया है और मामले की एक स्वतंत्र जांच के आदेश दे दिए हैं।

यह छात्रावास मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति से ताल्लुक रखने वाले वंचित परिवारों के बच्चों के लिए निजी तौर पर चलाया जाता है। इसे महाराष्ट्र समाज कल्याण विभाग की तरफ से आर्थिक मदद मिलती है। विभाग द्वारा हर छात्र के रहने, खाने और बुनियादी सुविधाओं के खर्च को पूरा करने के लिए 2,200 रुपये प्रति माह का अनुदान दिया जाता है। बच्चे यहां रहकर आस-पास के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और उनका दाखिला माता-पिता के जाति व आय प्रमाण पत्र के आधार पर होता है। अधिकारियों के मुताबिक, इस हॉस्टल की स्वीकृत क्षमता 50 छात्रों की है, जबकि वर्तमान में यहां 46 लड़के रह रहे थे।

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक बच्चे ने इस ज्यादती का विरोध किया और अपने माता-पिता को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस को सतर्क किया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़ितों का आरोप है कि बड़े छात्र उनके साथ मारपीट करते थे, उनसे पैसे वसूलते थे और जबरन नशीला पदार्थ पिलाकर हॉस्टल के सुनसान इलाकों या पास की झाड़ियों में ले जाकर उनका यौन शोषण करते थे। इसके साथ ही, बच्चों को इस बारे में किसी को कुछ भी बताने पर जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।

नासिक ग्रामीण के एसपी बालासाहेब पाटिल ने बताया कि अधीक्षक ने पुलिस को इस बारे में सूचित नहीं किया था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हॉस्टल के अन्य कर्मचारियों या मैनेजमेंट ट्रस्ट को इस कृत्य की भनक थी। एसपी ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी संलिप्तता सामने आती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पीड़ित बच्चों के माता-पिता मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूर हैं। काम के सिलसिले में उन्हें अक्सर दूर-दराज के इलाकों में भटकना पड़ता है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे, यह सोचकर उन्होंने अपने बच्चों को हॉस्टल में रखा था। एक डरे हुए पिता ने बताया कि उनका बच्चा इस घटना के बाद जीवन भर के लिए सदमे में चला गया है। वह इतना खौफजदा था कि उसने उसी हॉस्टल में रहने वाले अपने बड़े भाई तक को अपना दर्द नहीं बताया।

परिजनों का प्रशासन से सीधा सवाल है कि अगर महीनों से यह सब चल रहा था तो प्रबंधन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। कुछ परिजनों ने बताया कि छोटे बच्चों द्वारा पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की लगातार शिकायत करने के बाद अधीक्षक को शक हुआ था।

हॉस्टल से करीब 100 किलोमीटर दूर एक साइट पर काम करने वाले एक अभिभावक ने बताया कि जब एक बच्चे ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी, तब जाकर अन्य छात्रों से इस बारे में बातचीत शुरू हुई। परिजनों को अब यह भी पता चला है कि पुलिस ने अधीक्षक पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया है।

दूसरी ओर, अधीक्षक ने खुद को बलि का बकरा बनाए जाने का दावा किया है। उसका कहना है कि उसने महज़ एक महीने पहले ही यहां नौकरी शुरू की थी। मामला संज्ञान में आते ही उसने प्रबंधन को इसकी जानकारी दी, लेकिन संस्था की बदनामी के डर से उसे चुप रहने को कहा गया। अधीक्षक के दावे के मुताबिक, इसके बाद उसने खुद परिजनों को सारी बात बताई, जो बाद में पुलिस के पास पहुंचे।

इस मामले में हॉस्टल प्रबंधन ने चल रही जांच का हवाला देते हुए फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। इंस्पेक्टर सारिका अहीरराव के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम मामले की तहकीकात के लिए बनाई गई है। सभी पीड़ितों की मेडिकल जांच कराई गई है और फोरेंसिक टीम ने भी सबूत जुटाने के लिए हॉस्टल का दौरा किया है। नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने कहा कि बाल कल्याण समिति छात्रावास का दौरा कर अपनी जांच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

वहीं, समाज कल्याण आयुक्त दीपा मुधोल मुंडे ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट में खामी पाए जाने पर हॉस्टल चलाने की मंजूरी को रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित छात्रों को पास के ही दूसरे सहायता प्राप्त हॉस्टल में शिफ्ट किया जाएगा।

हालांकि, इस भयानक घटना के बाद माता-पिता बुरी तरह खौफ में हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उन्होंने एक रिश्तेदार से इस संस्था की तारीफ सुनी थी, लेकिन प्रबंधन ने बच्चों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। उन्होंने फिलहाल अपने बच्चों को घर वापस बुला लिया है और अभी उन्हें किसी अन्य छात्रावास में वापस भेजने की उनकी कोई योजना नहीं है।

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