नई दिल्ली: भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहे छात्रों के उग्र प्रदर्शन के आगे झारखंड सरकार को बड़ा कदम उठाना पड़ा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को अहम फैसला लेते हुए जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही साल 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को भी निरस्त कर दिया गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेतृत्व में छात्र लंबे समय से परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे।
सरकार द्वारा मुख्य मांगें मान लिए जाने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री सोरेन और राज्य सरकार का आभार जताया है। पिछले पंद्रह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे महतो ने कहा कि वह जल्द ही रांची के धरना स्थल पर जाकर अपना अनशन तोड़ेंगे। उन्होंने खुशी जताई कि सरकार परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सख्ती से जांच कर रही है और मुख्य सरगनाओं को पकड़ने की कोशिश हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए शिक्षा सुधारों की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक विशेष कैबिनेट बैठक के बाद इन कड़े फैसलों की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं, उनके परिणामों और इस एजेंसी के जरिए हुए चयन को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के संचालन के लिए पहले से एक एसओपी (SOP) मौजूद थी, जिसका अगर पालन किया जाता तो यह गड़बड़ी नहीं होती। छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए सोरेन ने भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाने का वादा किया है। इसके लिए एक खास पोर्टल भी शुरू किया गया है जहां छात्र, शिक्षक और अभिभावक परीक्षा सुधारों पर अपने सुझाव दे सकते हैं।
इस बीच, झारखंड सीआईडी ने सोमवार को रांची स्थित जेएसएससी कार्यालय पर छापेमारी शुरू कर दी। सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने बताया कि भर्ती घोटालों की जांच के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी ने अब तक पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते सहित 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।
राज्य की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने घोषणा की कि 14वीं जेपीएससी और बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखने जा रही है, जबकि सीआईडी जांच की निगरानी न्यायपालिका द्वारा की जाएगी। वहीं, मंत्री इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ, बीजेपी लगातार छात्रों की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन करती आ रही है।
इस पूरे मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी हस्तक्षेप किया था। उन्होंने 14 अगस्त को मुख्यमंत्री सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उनकी मांगों को जायज ठहराया था। राहुल ने मुख्यमंत्री से छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलने की अपील की थी। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू ने भी कहा कि उनकी पार्टी रोजगार की मांग कर रहे युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है। इसी राजनीतिक दबाव और सीआईडी छापों के बीच राज्य सरकार की चार सदस्यीय समिति और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच सोमवार को सातवें दौर की बातचीत तय की गई।
गौरतलब है कि जेपीएससी और जेएसएससी प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग को लेकर यह आंदोलन सोमवार को अपने 24वें दिन में प्रवेश कर गया था। धरना स्थल पर अब भी छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। दस अगस्त को यह आंदोलन तब और उग्र हो गया था जब हजारों छात्रों ने रांची में झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया था। बैरिकेड्स टूटने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया था। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें पूरी न होने पर 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का भी ऐलान किया था।
छात्रों के इस लंबे संघर्ष और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग को देखते हुए सरकार ने कई नए सुधारों की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत अब एक समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाएगा। इसके अलावा तकनीक आधारित सुरक्षित परीक्षाएं, उत्तर कुंजी और ओएमआर शीट का समय पर प्रकाशन सुनिश्चित किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय जवाबदेही तय करने का भी कड़ा फैसला लिया है।
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