साउथ अफ्रीकियों को बताया "खराब वर्क एथिक" वाला; भारतीय मूल की प्रोफेसर के खिलाफ देशव्यापी गुस्सा, क्या जाएगी नौकरी?

जानें कौन हैं श्रीला रॉय और क्यों पूरा दक्षिण अफ्रीका उनके खिलाफ है?
प्रो. श्रीला रॉय मूल रूप से भारत से हैं।
प्रो. रॉय ने 19 फरवरी को किये एक पोस्ट में दक्षिण अफ्रीकियों को कम महत्वाकांक्षा और संतुष्ट बताते हुए उनके 'खराब वर्क एथिक' पर टिप्पणी की, पोस्ट को बाद में डिलीट कर दिया गया।ग्राफिक- आसिफ निसार/ द मूकनायक
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जोहान्सबर्ग – दक्षिण अफ्रीका के प्रतिष्ठित विट्सवाटर्सरैंड यूनिवर्सिटी (Wits University) की सोशियोलॉजी विभाग की हेड प्रोफेसर श्रीला रॉय (Srila Roy) सोशल मीडिया पोस्ट के कारण गंभीर विवाद में फंस गई हैं। 19 फरवरी को एक्स पर उनकी पोस्ट में दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों को "कम महत्वाकांक्षा वाले, संतुष्ट और खराब काम करने वाले" बताया गया था। पोस्ट जल्द ही डिलीट कर दी गई, लेकिन इससे छात्र संगठनों, शिक्षाविदों, राजनीतिक दलों और संसद तक में आक्रोश फैल गया। अब यूनिवर्सिटी की एचआर विभाग जांच कर रहा है और संसद की उच्च शिक्षा समिति के चेयरपर्सन ने भी सख्त निंदा की है।

कौन हैं प्रो. श्रीला रॉय?

प्रो. श्रीला रॉय मूल रूप से भारत से हैं। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से फिलॉसफी में बीए किया। इसके बाद यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरविच से मास्टर्स इन फिलॉसफी एंड सोशल थ्योरी तथा पीएचडी इन सोशियोलॉजी पूरी की। 2001 में भारत छोड़कर यूके गईं और बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचीं।

वे ट्रांसनेशनल फेमिनिस्ट स्टडीज, डीकोलोनियल फेमिनिज्म, जेंडर-सेक्शुअलिटी पॉलिटिक्स और भारत के नक्सलबाड़ी आंदोलन जैसे विषयों की विशेषज्ञ हैं। उनकी प्रमुख किताबें:

Remembering Revolution: Gender, Violence and Subjectivity in India’s Naxalbari Movement (2012)

Changing the Subject: Feminist and Queer Politics in Neoliberal India (2022, Duke University Press)

वे Wits University में प्रोफेसर और सोशियोलॉजी विभाग की हेड हैं। पहले यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम में लेक्चरर रह चुकी हैं। उनकी रिसर्च मुख्यतः भारत और दक्षिण अफ्रीका के #MeToo, नियो-लिबरलिज्म और फेमिनिस्ट पॉलिटिक्स पर केंद्रित है।

विवाद का पूरा बैकग्राउंड

यह विवाद दक्षिण अफ्रीकी संसद की पोर्टफोलियो कमिटी ऑन हायर एजुकेशन की हालिया रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें कहा गया कि साउथ अफ्रीकी यूनिवर्सिटीज में विदेशी नागरिकों (स्टाफ/अकादमिक्स) का हिस्सा 7.7% है। कुछ लोगों ने इसे लेकर चिंता जताई थी कि इससे लोकल साउथ अफ्रीकियों को अवसर कम मिल रहे हैं।

इस चर्चा के जवाब में प्रो. रॉय ने 19 फरवरी को अपनी पर्सनल एक्स अकाउंट से लिखा: “South Africans have little ambition, are complacent and have a poor work ethic. Take that for your xenophobia that us foreigners are meant to suffer in silence, as we nurture successive generations at university.”

(दक्षिण अफ्रीकियों में कम महत्वाकांक्षा है, वे संतुष्ट हैं और उनकी काम करने की आदत खराब है। ये लो तुम्हारी विदेश-विरोधी भावना के लिए, जिसे हम विदेशी चुपचाप सहते हैं, जबकि हम यूनिवर्सिटी में पीढ़ी-दर-पीढ़ी को पालते-पोसते हैं।)

यह पोस्ट विदेशी शिक्षकों की भूमिका का बचाव करते हुए लिखी गई थी, लेकिन इसे दक्षिण अफ्रीकियों के खिलाफ सामान्यीकरण और अपमानजनक माना गया। पोस्ट वायरल होने के बाद रॉय ने उसे डिलीट कर दिया। बाद में उन्होंने माफी भी मांगी, लेकिन वह माफी वाला पोस्ट भी डिलीट कर दिया गया।

इन संगठनों ने जताई नाराज़गी

EFF Youth Command (EFFYC) नामक संगठन ने इसे “लापरवाह, गहरा अपमानजनक, उत्तेजक और अप्रासंगिक” बताया। एक बयान में कहा कि दक्षिण अफ्रीकी रोजाना बेरोजगारी, असमानता और अपार्थेड के घावों से जूझते हुए भी बिजनेस शुरू करते हैं, समुदायों को शिक्षित करते हैं, साइंस-टेक में इनोवेट करते हैं और ग्लोबल स्टेज पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। EFFYC ने रॉय की तुरंत बर्खास्तगी की मांग की और विट्स से “सम्मान, जवाबदेही और सम्मानजनक चर्चा” की अपील की।

South African Sociological Association (SASA) ने गहरी चिंता जताते हुए टिप्पणियों को क्लासिस्ट, रेसिस्ट और ज़ेनोफोबिक करार दिया। एक स्टेटमेंट में सासा ने कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच में जिम्मेदारी भी शामिल है। मांग की कि रॉय विट्स की लोकल ऑर्गनाइजिंग कमिटी से इस्तीफा दें और सभी कॉन्फ्रेंस जिम्मेदारियों से हटाई जाएं। छात्रों-स्टाफ की “बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और अस्तित्वगत सुरक्षा” की रक्षा की जरूरत बताई।

संसद की उच्च शिक्षा समिति के चेयरपर्सन टेबोगो लेट्सी ने 25 फरवरी को स्टेटमेंट जारी कर टिप्पणियों को “ बहुत अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताया। लेट्सी ने कहा कि सोशियोलॉजी विभाग की हेड होने के नाते रॉय को असमानता, जेंडर और डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर काम करना चाहिए, न कि लोगों की गरिमा को कम करना। विट्स मैनेजमेंट से तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।

यूनिवर्सिटी ने बिठाई जांच

यूनिवर्सिटी ऑफ़ द विटवाटरसैंड ने कन्फर्म किया है कि उसे इन पोस्ट के बारे में शिकायतें मिली हैं और वह सीधे रॉय से इस मामले पर बात कर रही है। यूनिवर्सिटी ने ज़ोर देकर कहा कि सही प्रोसेस अपनाया जाएगा, और बराबरी, इज्ज़त, भेदभाव न करने और सभी स्टूडेंट्स और स्टाफ़ के लिए एक सुरक्षित, सबको साथ लेकर चलने वाला एकेडमिक माहौल बनाने का अपना वादा दोहराया है। एचआर विभाग ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। एक बयान में कहा गया कि “हम पूर्वाग्रह, भेदभाव या नस्लवाद के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं। ऐसा आचरण जो हमारी मूल्यों, नीतियों और समानता-गरिमा-गैर-भेदभाव की प्रतिबद्धता को कमजोर करे, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार चलेगी। यूनिवर्सिटी ने विविधता, समावेश और जवाबदेही वाले माहौल की प्रतिबद्धता दोहराई। अभी तक रॉय की बर्खास्तगी या सस्पेंशन की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दबाव बढ़ता जा रहा है।

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