JNU वीसी शांतिश्री डी. पंडित की मुश्किलें बढ़ीं, कथित नफरत भरे बयानों को लेकर NCSC में शिकायत दर्ज

जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के कथित नफरत भरे बयानों को लेकर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने NCSC में SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, वीसी ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है।
जेएनयू कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित
जेएनयू कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित
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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) के पूर्व अध्यक्ष धनंजय ने विश्वविद्यालय की कुलपति (वीसी) शांतिश्री डी. पंडित के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का दरवाजा खटखटाया है। यह शिकायत एक सार्वजनिक मंच पर वीसी द्वारा कथित तौर पर दिए गए नफरत भरे बयानों को लेकर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उनके इन बयानों से दलित समुदाय के खिलाफ शत्रुता, घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा मिला है।

SC/ST एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की मांग

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष (2023-24) धनंजय ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि कुलपति की टिप्पणियां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन हैं।

आपको बता दें कि SC/ST एक्ट विशेष रूप से इन समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों और हेट क्राइम्स को रोकने के लिए बनाया गया था। यह कानून ऐसे किसी भी कृत्य को अपराध मानता है जो दलित या आदिवासी समुदाय के सदस्यों का अपमान करता हो, उन्हें नीचा दिखाता हो, या समाज में उनके खिलाफ शत्रुता पैदा करता हो।

याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। शिकायत में मांग की गई है कि:

  • मामले का संज्ञान लेते हुए SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

  • एक स्वतंत्र समिति के माध्यम से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो।

  • कुलपति के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटाया जाए।

शिकायतकर्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि वीसी की तरफ से अब तक अपने बयानों को लेकर कोई माफी नहीं मांगी गई है, जो यह दर्शाता है कि उनकी टिप्पणियां जानबूझकर की गई थीं और इनका मकसद भेदभाव को बढ़ावा देना था।

वीसी ने किया अपना बचाव, बताया राजनीतिक साजिश

इस बढ़ते विवाद के बीच, रविवार को वीसी शांतिश्री डी. पंडित ने दलितों और अश्वेतों से जुड़ी अपनी हालिया टिप्पणियों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके बयानों को संदर्भ से अलग कर दिया गया है और कुछ गुटों द्वारा "राजनीतिक उद्देश्यों" की पूर्ति के लिए उन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

वीसी की यह सफाई ऐसे समय में आई है जब जेएनयू छात्रसंघ सहित कई छात्र संगठन 16 फरवरी को पब्लिश हुए एक पॉडकास्ट में की गई उनकी टिप्पणियों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस्तीफे पर अड़े हैं।

इस बीच, वीसी द्वारा मीडिया के साथ साझा किए गए एक लिखित बयान में कई फैकल्टी सदस्यों ने भी उन्हें अपना "अटूट समर्थन" दिया है। इन शिक्षकों ने जेएनयू छात्रसंघ और जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) पर आरोप लगाया है कि वे कैंपस में चुनिंदा नैरेटिव सेट करके वैचारिक विमर्श को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?

यह पूरा विवाद उस पॉडकास्ट से शुरू हुआ, जिसमें कुलपति उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रस्तावित '2026 इक्विटी (भेदभाव-विरोधी) विनियमों' पर चर्चा कर रही थीं।

ऑनलाइन वायरल हो रहे एक क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि दलित और अश्वेत लोग "हमेशा के लिए पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते।" वीसी के इसी बयान ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद से ही छात्र समूहों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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