हिमाचल हाईकोर्ट से दलित छात्र की खुदकुशी मामले में महिला को मिली जमानत, अदालत ने कहा- 'अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रख सकते'

HP High Court Bail News: कोर्ट ने कहा- महिला होने के नाते आरोपी 'विशेष विचार' की हकदार, पुलिस की जांच थ्योरी पर भी उठाए सवाल
Himachal High Court
हिमाचल हाईकोर्ट
Published on

शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक दलित किशोर की आत्महत्या से जुड़े मामले में आरोपी महिला को जमानत दे दी है। इस मामले में महिला पर आरोप था कि उसने 12 वर्षीय दलित लड़के को गौशाला में बंधक बनाकर रखा था, जिसके बाद लड़के ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली थी। अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि एक महिला होने के नाते आरोपी "विशेष विचार" (Special Consideration) की हकदार है और उसे मुकदमे के दौरान "अनिश्चित काल" के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता।

न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आरोपी महिला, जो उच्च जाति (राजपूत) से संबंध रखती है, पर आरोप था कि उसने सितंबर 2025 में हुई इस दुखद घटना में भूमिका निभाई थी।

क्या है पूरा मामला?

सितंबर 2025 में एक 12 वर्षीय दलित छात्र ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया था, जिसके बाद वह बेहोश हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला और उसके साथ दो-तीन अन्य लोगों ने नाबालिग को पीटा और उसे गौशाला में बंद कर दिया था। महिला का दावा था कि बच्चे ने उसके घर को छू लिया है, जिससे घर "अपवित्र" हो गया है। आरोप है कि महिला ने शर्त रखी थी कि जब तक शुद्धिकरण के लिए "बलि का बकरा" नहीं लाया जाता, तब तक बच्चे को नहीं छोड़ा जाएगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ और पुलिस की जांच पर सवाल

जमानत याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति कैंथला ने कहा, "याचिकाकर्ता एक महिला है, इसलिए वह विशेष रियायत की हकदार है। केवल मुकदमे के लंबित रहने के कारण उसे अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।"

इससे पहले, अक्टूबर में अदालत ने महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी क्योंकि 17 सितंबर, 2025 को जब बच्चे के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी, तो पुलिस ने शुरुआत में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं नहीं जोड़ी थीं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को "बेहद अस्पष्ट" करार दिया और कहा कि इसमें मामले के तथ्यों का सही उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर भी कई अहम बिंदु उठाए:

चार्जशीट के मुताबिक, बच्चे को गौशाला में बंद किया गया था, जहाँ से वह रोशनदान (Ventilator) की जाली तोड़कर भाग गया। फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है। आरोप था कि महिला ने घर को शुद्ध करने के लिए "बलि का बकरा" मांगा था। हालांकि, चार्जशीट में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि उस क्षेत्र में ऐसी कोई प्रथा प्रचलित थी या नहीं। कोर्ट ने माना कि यह आरोप अभियोजन पक्ष के दावे को कमजोर करता है।

अदालत ने तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता का मानना था कि बच्चे के छूने से उसका घर "अपवित्र" हो गया है, तो फिर उसे घर के भीतर (गौशाला में) ही कैद करना विरोधाभासी लगता है।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष की कहानी पर प्रथम दृष्टया संदेह उत्पन्न होता है।

बचाव पक्ष की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय कोचर ने पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि महिला पर बच्चे को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पूरी तरह झूठा है।

उन्होंने कहा, रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जो महिला को सीधे अपराध से जोड़ता हो। राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस ने जांच में पक्षपात किया है। चूंकि पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, इसलिए महिला को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। वह महिला होने के नाते जमानत की हकदार है और सभी शर्तों का पालन करेगी।

अभियोजन पक्ष का विरोध

दूसरी ओर, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता लोकेंद्र कुटलेहड़िया और पीड़ित पक्ष के वकील राजू राम राही ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि, याचिकाकर्ता ने बच्चे को सिर्फ इसलिए पीटा क्योंकि उसने घर को छू लिया था, जो साफ तौर पर जातिगत भेदभाव को दर्शाता है। महिला के इस आचरण से इलाके में भारी आक्रोश है। आरोपी ने शिकायतकर्ता के परिवार को धमकाया था, जिसके संबंध में एक एफआईआर भी दर्ज है। जमानत पर बाहर आने के बाद वह गवाहों को डरा-धमका सकती है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने महिला को जमानत दे दी।

Himachal High Court
यूजीसी एक्ट 2026 की बहाली के लिए संघर्ष रहेगा जारी, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा
Himachal High Court
सहारनपुर: रैगिंग का शिकार हुआ BAMS छात्र? सड़क हादसे में मौत को परिजनों ने बताया हत्या, 6 छात्रों पर FIR दर्ज
Himachal High Court
IIM Bangalore में जातिवाद: दलित प्रोफेसर का प्रमोशन 2022 से अटका, जातिगत भेदभाव के आरोपी सहकर्मी को पेंडिंग FIR के बावजूद प्रमोशन!

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com