
नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद रैली स्थल के 'शुद्धिकरण' को लेकर नैनीताल पुलिस ने एक कड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 8 सितंबर को पुलिस ने इस कृत्य के लिए 'अज्ञात लोगों' के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर ली है। यह पूरा मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़ा है, जहां 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष ने एक विशाल रैली को संबोधित किया था।
रैली के ठीक तीन दिन बाद, 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के सदस्यों ने इसी मैदान में एक 'शुद्धिकरण यज्ञ' का आयोजन किया था। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ था। उस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता था कि कई लोग वहां हवन कर रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने इस आयोजन के बाद मीडिया से बातचीत भी की थी।
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मंजूनाथ टीसी ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह एफआईआर कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। उनके अनुसार, अंजू इस मामले में पुलिस को औपचारिक शिकायत सौंपने वाली पहली व्यक्ति थीं। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस को इस प्रकरण में कई अन्य याचिकाएं और शिकायतें भी मिली थीं। उचित जांच-पड़ताल और कानूनी सलाह के बाद ही यह मुकदमा दर्ज किया गया है। अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच पुलिस अधीक्षक (अपराध) जगदीश चंद्र द्वारा की जाएगी।
पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 और 299 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब कांग्रेस पार्टी लगातार रैली स्थल का शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ सख्त पुलिस कार्रवाई की मांग कर रही थी। पार्टी का सीधा आरोप था कि यह कृत्य इसलिए किया गया क्योंकि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं। दूसरी ओर, आयोजकों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस अनुष्ठान का खड़गे या किसी जातिगत मंशा से कोई सीधा लेना-देना नहीं था।
इस विवाद से जुड़ा एक और पहलू पिछले सप्ताह ही सामने आया था। पुलिस ने हल्द्वानी के इस 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान पर टिप्पणी करने को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भी एक मामला दर्ज किया था। यह एफआईआर श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े विनोद कुमार आर्य और अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई थी। अमित कुमार स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उनका आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।
यह मुद्दा इतना गर्मा गया था कि खड़गे ने हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी इसे उठाया था। उन्होंने शुद्धिकरण करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी और छुआछूत से जुड़े कानूनों के तहत उन पर केस चलाने की जोरदार मांग की थी। वहीं दूसरी तरफ, पिछले हफ्ते ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस अनुष्ठान का समर्थन करके विवाद को और हवा दे दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि रैली स्थल पर लगे 'नारों' से भगवान राम से जुड़ा वह पवित्र स्थान प्रदूषित हो गया था, इसलिए शुद्धिकरण किया गया।
इस एफआईआर के दर्ज होने की टाइमिंग को भी काफी अहम माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी 11 और 12 सितंबर को उत्तराखंड के दौरे पर रहने वाले हैं। ऐसे में उनके दौरे से ठीक पहले पुलिस की इस कार्रवाई ने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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