बिहार में 65% आरक्षण पर विवाद: पटना की सड़कों पर जनसैलाब, पुलिस छावनी में तब्दील हुआ डाक बंगला चौराहा

पटना में 65% आरक्षण की मांग पर बड़ा बवाल। राजभवन मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने डाक बंगला चौराहे पर रोका, कई लोग हिरासत में।
Bihar reservation protest
बिहार में 65% आरक्षण की मांग को लेकर पटना में भारी विरोध प्रदर्शन। राजभवन की ओर बढ़ रहे एससी-ओबीसी संगठनों को पुलिस ने रोका।
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बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। अनुसूचित जाति और ओबीसी संगठनों से जुड़े सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध मार्च निकाला। इनकी प्रमुख मांग राज्य में मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें कुछ देर बाद छोड़ दिया गया।

यह पूरा विवाद उस 65 प्रतिशत कोटे को लागू करने से जुड़ा है, जिसे साल 2024 में पटना उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक करार दिया था। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन 'आरक्षण बढ़ाओ संविधान बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले किया गया। दलित अधिकार कार्यकर्ता अमर पासवान आजाद ने इस उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

गौरतलब है कि साल 2022-23 की बिहार जाति आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया था। हालांकि, 2024 में पटना हाई कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिससे संगठनों में आक्रोश बढ़ गया।

वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो बिहार सरकार 50 प्रतिशत आरक्षण के फॉर्मूले पर काम कर रही है। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को एक प्रतिशत आरक्षण मिलता है। वहीं, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को 18 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 12 प्रतिशत और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए तीन प्रतिशत कोटा तय है।

हाल के दिनों में ऐसे प्रदर्शनों की बढ़ती संख्या और गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था। सुरक्षा के मद्देनजर 20 से अधिक थानों की पुलिस को तैनात किया गया था। गांधी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च राजभवन की ओर बढ़ रहा था। लेकिन पुलिस ने डाक बंगला चौराहे पर लोहे के अस्थायी गेट और बैरियर लगाकर भीड़ को वहीं रोक दिया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमर पासवान आजाद ने मीडिया से बातचीत में अपनी दो मुख्य मांगें स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के 65 प्रतिशत कोटे के फैसले को कानूनी संरक्षण देने के लिए इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, एक समावेशी समाज के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने कई अन्य गंभीर मुद्दे भी उठाए। इनमें एससी/एसटी उप-योजना कोष को अन्य विभागों में भेजने पर रोक लगाने और दलितों के घरों पर हो रही बुलडोजर कार्रवाई को तुरंत बंद करने की मांग शामिल थी। साथ ही, दलितों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, संविदा कार्यों में 50 प्रतिशत आरक्षण और एससी/एसटी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।

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