मणिपुर में 6 नागरिकों की हत्या पर भड़का यूएनसी, प्रमुख नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन नाकेबंदी शुरू

6 नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में यूनाइटेड नागा काउंसिल का बड़ा कदम, नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन नाकेबंदी का ऐलान और उपमुख्यमंत्री को हटाने की मांग।
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कोहिमा से मणिपुर का हाईवे फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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मणिपुर में नागा समुदायों के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने अपना विरोध तेज कर दिया है। संगठन ने मंगलवार, 8 सितंबर को ऐलान किया कि बुधवार, 9 सितंबर को रात 1 बजे से राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी को और सख्त किया जाएगा।

यह कड़ा फैसला 2 सितंबर को उखरूल में आयोजित यूएनसी की आपातकालीन अध्यक्षीय परिषद की बैठक के बाद लिया गया है। इस अहम बैठक में संगठन की प्रमुख मांगों पर सरकार के सुस्त रवैये और उसकी प्रतिक्रिया की गहन समीक्षा की गई थी।

यूएनसी का स्पष्ट कहना है कि यह नाकेबंदी पूरी तरह से जायज है। सरकार उन छह लियांगमाई नागा नागरिकों के परिवारों को न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रही है, जिनका 13 मई को कांगपोकपी जिले के लीलॉन वैफेई गांव से अपहरण कर बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी।

संगठन की दो टूक मांग है कि इन छह नागाओं की हत्या में शामिल दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई हो। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की भी पुरजोर मांग की जा रही है, जिन पर कुकी सशस्त्र समूहों के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप है।

यूएनसी के प्रवक्ता एच. जेम्स हाऊ द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह अनिश्चितकालीन नाकेबंदी कई अहम रास्तों को प्रभावित करेगी। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (इम्फाल-दीमापुर), एनएच-202 (इम्फाल-उखरूल-जेसामी), एनएच-37 (इम्फाल-जिरीबाम) और एनएच-102ए (तदुबी-उखरूल) पूरी तरह से शामिल हैं।

हालांकि, आम जनजीवन की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष छूट भी दी गई है। यूएनसी ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को ले जाने वाले वाहनों को इस बंद से मुक्त रखा जाएगा। इनमें चिकित्सा आपूर्ति, मीडिया, बिजली, दूरसंचार और जल आपूर्ति से जुड़े वाहन शामिल होंगे।

इस ताजा नाकेबंदी का सीधा असर एनएच-2 के रास्ते चलने वाली इम्फाल-गुवाहाटी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पड़ने की पूरी आशंका है। तीन साल से अधिक समय तक बंद रहने के बाद इसी साल अगस्त में यह बस सेवा दोबारा शुरू की गई थी। वैसे भी 3 मई, 2023 को कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही काफी हद तक प्रभावित रही है।

राज्य के मौजूदा हालात पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंददास ने सदन में एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने बताया कि कुकी और नागाओं के बीच फरवरी से चल रही झड़पों सहित विभिन्न जातीय संघर्षों में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है।

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