क्या आपने 'फ्री उमर खालिद' के नारे लगाए? नीट प्रदर्शनकारियों से गोवा पुलिस के 240 सवाल, जानें पूछताछ में क्या-क्या हुआ

गोवा पुलिस ने नीट पेपर लीक प्रदर्शनकारियों से पूछे 240 सवाल, 'फ्री उमर खालिद' के नारों और फंडिंग को लेकर हुई लंबी पूछताछ।
NEET paper leak Protest in Goa
गोवा में NEET प्रदर्शनकारियों से पुलिस ने 'फ्री उमर खालिद' के नारों और फंडिंग पर 240 सवाल पूछे।
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नई दिल्ली: 24 जुलाई को गोवा के मापुसा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे नीट पेपर लीक विरोध के समर्थन में एक प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन में शामिल कम से कम दो कार्यकर्ताओं को गोवा पुलिस की एक लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा है। पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को 240 सवालों वाली एक प्रश्नावली थमा दी। इसमें "फ्री उमर खालिद शब्दों से आप क्या समझते हैं?", "क्या आपने अपने भाषण में किसी सरकारी अधिकारी की आलोचना की?" और "इस विरोध प्रदर्शन को किसने फंड किया?" जैसे कई तीखे सवाल शामिल थे।

इस विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद यानी शनिवार शाम को पणजी के आजाद मैदान में एक सभा हुई थी। यहां 'फ्री उमर खालिद' की तख्ती ले जाने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। इसके बाद 'सिटिजन्स ऑफ मापुसा' नामक एक स्थानीय समूह ने पुलिस को एक आवेदन सौंपा। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने रविवार और सोमवार को कम से कम दो प्रदर्शनकारियों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों से कम से कम 240 सवालों की एक विस्तृत सूची भरवाई। इस प्रश्नावली में पूछा गया कि प्रदर्शन का नेतृत्व कौन कर रहा था और क्या वे इस विरोध से जुड़े किसी व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल ग्रुप के सदस्य हैं। इसके अलावा, उनसे कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के तरीके, प्रदर्शन के पीछे के असली मकसद और किसी राजनीतिक दल, एनजीओ या सामाजिक संगठन से उनके जुड़ाव को लेकर भी सवाल किए गए।

इनमें से कई सवाल सीधे तौर पर जेएनयू के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद से जुड़े थे। खालिद पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सिलसिले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने कार्यकर्ताओं से पूछा कि क्या वे विरोध में आने से पहले उमर खालिद की पृष्ठभूमि से वाकिफ थे और क्या उन्होंने 'फ्री उमर खालिद' के नारे लगाए थे।

पूछताछ में यह भी शामिल था कि अगर उन्होंने नारे लगाए, तो कितनी बार लगाए और क्या उनके पीछे अन्य लोगों ने भी इसे दोहराया। बैनर, तख्तियां और साउंड सिस्टम की व्यवस्था या फंडिंग किसने की, इसे लेकर भी जवाब मांगे गए। पुलिस यह भी जानना चाहती थी कि मौके पर कितनी तख्तियां बांटी गईं और क्या प्रदर्शनकारियों ने तख्ती पकड़े हुए अपनी कोई तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। अधिकारियों ने उनसे उनके पिछले प्रदर्शनों का इतिहास, फोन की जांच की अनुमति और विरोध से जुड़ा कोई इलेक्ट्रॉनिक डेटा डिलीट करने के बारे में भी पूछा।

इस पूरे मामले पर नॉर्थ गोवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरीशचंद्र मडकईकर ने बताया कि 'सिटिजन्स ऑफ मापुसा' समूह की ओर से एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी के आधार पर प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जाने दिया गया। इतनी लंबी प्रश्नावली पर स्पष्टीकरण देते हुए एसपी ने कहा कि जांच के दौरान कुछ सवाल पूछे गए थे और जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल जाता, तब तक सवाल पूछना एक सामान्य प्रक्रिया है।

इस बीच, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान नीट पेपर लीक के विरोध में खालिद की रिहाई की मांग वाली तख्तियां लाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों को नीट मुद्दे पर विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन आजाद मैदान में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु से संबंध रखने वाले उमर खालिद की रिहाई की तख्तियां दिखाना बेहद निचले स्तर की हरकत है।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि नीट के विरोध में उमर खालिद का मुद्दा क्यों लाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रहित में जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपना इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री ने छात्रों में राष्ट्रवाद जगाने की जरूरत पर जोर दिया ताकि सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़े। इससे पहले रविवार को भी मुख्यमंत्री सावंत ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए बयान दिया था कि राज्य में राष्ट्रविरोधी भावनाओं को फैलाने और शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ पुलिस कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।

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