'पुलिस का काम अपराध रोकना है, शादियां नहीं', बालिग जोड़े के मामले में ताक-झांक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग जोड़े की शादी में दखल देने पर भदोही पुलिस को लगाई कड़ी फटकार, एसपी और एसएचओ पर ठोका जुर्माना।
Allahabad High Court, UP Police
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग जोड़े की शादी की जांच करने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर एसपी और एसएचओ पर जुर्माना लगाया।
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उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले एक बालिग जोड़े के मामले में अनावश्यक जांच को लेकर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि पुलिस का काम अपराधों की जांच करना है, शादियों की नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस को दूसरों के मामलों में बेवजह ताक-झांक (nosy parkers) करने का कोई अधिकार नहीं है।

अधिकारियों पर जुर्माना और एफआईआर रद्द

बीती 27 जुलाई को दिए गए एक आदेश में, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। बेंच ने भदोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और सुरियावां थाने के एसएचओ (SHO) पर जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, अदालत ने महिला के पिता द्वारा युवक के खिलाफ दर्ज कराई गई अपहरण और जबरन शादी कराने की एफआईआर को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया।

अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पुलिस को लोगों के निजी मामलों में दखल देने से बचना चाहिए। जजों ने कहा कि वे पुलिस को बार-बार यह याद दिला चुके हैं कि शादियों की जांच करना उनका काम नहीं है। उन्हें केवल अपराधों की जांच करनी चाहिए और आपसी सहमति से की गई शादी कोई अपराध नहीं है, जहां किसी भी तरह की जांच की आवश्यकता हो।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में याचिका दायर करने वाले जोड़े की उम्र क्रमशः 28 और 27 वर्ष है। दोनों ही उच्च शिक्षित हैं; उन्होंने पोस्टग्रेजुएशन किया है और उनके पास टीचिंग का सर्टिफिकेट कोर्स भी है। वर्तमान में, युवक मध्य प्रदेश में एक सरकारी स्कूल शिक्षक के पद पर कार्यरत है। इस जोड़े ने भदोही जिले में 19 अप्रैल को युवक के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था और खुद को बालिग बताया था।

अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों एक साल से रिलेशनशिप में थे और उन्होंने 18 फरवरी को प्रयागराज में आर्य समाज के रीति-रिवाजों से शादी कर ली थी। महिला के पिता को इस शादी की भनक 18 अप्रैल को लगी, जिसके ठीक अगले दिन उन्होंने युवक के खिलाफ अपहरण का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया।

अप्रैल के आदेश के बावजूद पुलिस की मनमानी

याचिका दायर होने के बाद, 29 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि देश के दो बालिग नागरिकों ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की है। प्रथम दृष्टया एफआईआर में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसकी जांच की जानी चाहिए। अपने उस अंतरिम आदेश में, अदालत ने पुलिस जांच और याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी दोनों पर रोक लगा दी थी।

इसके बावजूद भदोही के एसपी इस बात पर अड़े रहे कि मामले की जांच पूरी की जानी चाहिए। 27 जुलाई के आदेश में बेंच ने पुलिस के इसी रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि उनके सामने दर्ज किए गए बयानों को देखते हुए इस मामले को वहीं खत्म कर दिया जाना चाहिए था।

जांच जारी रखना लगभग अवमाननापूर्ण कृत्य

जांच अधिकारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने महिला का बयान दर्ज कराने की एसपी की जिद को अदालत ने लगभग अवमाननापूर्ण करार दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा महिला का बयान दर्ज कर लिए जाने के बाद, राज्य की किसी भी अदालत या पुलिस अधिकारी को इस मामले में कोई नया बयान दर्ज करने और उसके आधार पर अलग राय बनाने का कोई अधिकार नहीं है।

न्यायाधीशों ने माना कि पुलिस वास्तव में महिला के पिता का पक्ष ले रही थी और बयान दर्ज करने के बहाने जांच को खींचना चाहती थी। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि एक बालिग महिला द्वारा अपनी पसंद के जीवनसाथी को चुनने और दो व्यस्क नागरिकों की शादी के मामले में जांच जारी रखना आपराधिक कानून का खुला दुरुपयोग है। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दी गई जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है।

पुलिस और महिला के पिता पर लगा जुर्माना

हाईकोर्ट के 29 अप्रैल के विस्तृत आदेश के बावजूद शादी की जांच करने की पुलिस की जिद और महिला के पिता द्वारा झूठी एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई को गंभीरता से लिया गया। अदालत ने तय किया कि राज्य सरकार के अधिकारियों और महिला के पिता पर हर्जाना लगाया जाना चाहिए। कोर्ट ने भदोही के एसपी और सुरियावां पुलिस स्टेशन के एसएचओ को संयुक्त रूप से 1,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, महिला के पिता को अपनी ही बेटी को मुआवजे के तौर पर 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

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