
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय से मिड-डे मील (MDM) योजना में घोर लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां बच्चों के पोषण के साथ खिलवाड़ करते हुए उन्हें पानी मिली हुई दूध पिलाई गई। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और तत्काल कार्रवाई करते हुए स्कूल की हेड टीचर को निलंबित कर दिया गया है।
यह घटना महोबा के दिखवाहा (Dikhwaha) स्थित प्राथमिक विद्यालय की है। बुधवार को स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील दिया जाना था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रसोइया 500 मिलीलीटर (आधा लीटर) के दूध के दो पैकेट, यानी कुल एक लीटर दूध, पानी से भरी एक पूरी बाल्टी में मिला रहा है। आरोप है कि पानी मिला हुआ यही दूध बाद में स्कूल के बच्चों को बांट दिया गया।
मिड-डे मील के वितरण की जिम्मेदारी स्कूल की हेड टीचर मोनिका सोनी की थी। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और शुक्रवार को मोनिका सोनी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
महोबा के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), राहुल मिश्रा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना बुधवार को हुई थी। उन्होंने कहा, "खंड शिक्षा अधिकारी (Block Education Officer) द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह बात सही पाई गई कि बच्चों को वही दूध दिया गया था जिसमें भारी मात्रा में पानी मिलाया गया था। इस आधार पर हमने हेड टीचर को निलंबित कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच चल रही है।"
राहुल मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर विस्तृत जांच में और भी अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मिड-डे मील में इस तरह की धांधली का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश के विभिन्न जिलों से ऐसी खबरें आ चुकी हैं जिन्होंने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं:
अक्टूबर 2021 (मेरठ): एक सरकारी स्कूल में महज 2 लीटर दूध में 5 लीटर पानी मिलाकर बच्चों को परोस दिया गया था।
नवंबर 2019 (सोनभद्र): यहां क्रूरता की हद पार करते हुए एक बाल्टी पानी में सिर्फ 1 लीटर दूध मिलाकर 81 बच्चों में बांट दिया गया था।
अगस्त 2019 (मिर्जापुर): मिर्जापुर के एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर सिर्फ रोटी और नमक बांटती नजर आई थी।
सरकार की मिड-डे मील योजना, जिसे अब 'पीएम पोषण' (PM Poshan) के नाम से जाना जाता है, का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना है। लेकिन आए दिन सामने आने वाली ऐसी घटनाएं बताती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी के कारण बच्चों की सेहत के साथ किस तरह समझौता किया जा रहा है।
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