कर्नाटक में 56 हजार पदों पर नई भर्ती में आरक्षण कटौती से विवाद: सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे दलित और एसटी समुदाय
कर्नाटक: राज्य सरकार द्वारा 56,432 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के हालिया निर्देश के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय की है और अनुसूचित जाति (SC) के भीतर लागू आंतरिक आरक्षण को भी हटा दिया है। सरकार के इस फैसले से प्रभावित दलित (वामपंथी) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय खासे नाराज हैं और इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।
मंत्रियों के इस्तीफे की उठ सकती है मांग
सरकार पर दबाव बनाने के लिए ये समुदाय सिद्धारमैया कैबिनेट में शामिल दलित (वाम) मंत्रियों— के.एच. मुनियप्पा और आर.बी. तिम्मापुर के इस्तीफे की मांग कर सकते हैं। इसके साथ ही, इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
करीब चार दशकों से आंतरिक आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे दलित (वाम) समुदाय कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR) की उस अधिसूचना से बेहद खफा हैं, जिसमें बिना आंतरिक आरक्षण और 50% की सीमा के साथ विभागों को भर्ती शुरू करने को कहा गया है। वहीं, एसटी समुदाय की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनका कोटा 7% से घटाकर वापस पहले की तरह 3% कर दिया गया है।
हजारों पदों के नुकसान का दावा
इन समुदायों के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगे। हालांकि, सरकार की तरफ से कहा गया है कि अदालत का अंतिम फैसला आने तक SC और ST के लिए क्रमशः 2% और 4% पद आरक्षित रखे जाएंगे। लेकिन समुदायों का दावा है कि इस व्यवस्था से मौजूदा भर्ती चक्र में एससी वर्ग को 1,128 और एसटी वर्ग को 2,257 पदों का सीधा नुकसान होने जा रहा है।
9वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
मैसूर स्थित वाल्मीकि समुदाय के युवा संगठन 'एकलव्य विद्यार्थी युवाजन परिषद' के अध्यक्ष दीपक पालेगर ने कहा, "हम नहीं चाहते कि सरकार 7% आरक्षण सुनिश्चित किए बिना यह भर्ती प्रक्रिया शुरू करे। राज्य सरकार को 56% आरक्षण को 9वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए। हमें 7% आरक्षण हमारी आबादी के आधार पर दिया गया था। अगर इसी तरह भर्तियां हुईं, तो हमारे समुदाय को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।"
परिषद के महासचिव प्रह्लाद पालेगर ने इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा, "जब 56% कुल आरक्षण और एससी का आंतरिक आरक्षण—दोनों ही मामले अदालत में विचाराधीन हैं, तो सरकार 50% की सीमा के साथ भर्ती कैसे कर सकती है? क्या यह कानूनी रूप से सही है? हम इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे।"
अपनी अगली रणनीति पर चर्चा करने के लिए परिषद के सदस्यों ने सोमवार को पूर्व सांसद वी.एस. उग्रप्पा से भी मुलाकात की।
विरोध प्रदर्शन और राज्यव्यापी बंद की तैयारी
इस बीच, आरक्षण व्यवस्था से आंतरिक आरक्षण को हटाए जाने के खिलाफ 'फेडरेशन ऑफ मादिगा संघ' के बैनर तले कई दलित (वाम) संगठन लामबंद हो गए हैं।
'सामाजिक न्याय के लिए आंतरिक आरक्षण समिति' ने पहले ही 11 मार्च को बेंगलुरु में एक विशाल रैली और तुमकुरु से बेंगलुरु तक पदयात्रा निकालने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा, समिति अन्य संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर फैसले के विरोध में राज्यव्यापी बंद बुलाने की भी योजना बना रही है। समिति के समन्वयक बसवराज कोवथाल ने बताया कि आगामी विरोध प्रदर्शनों की विस्तृत रूपरेखा जल्द तय की जाएगी।
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