'शिवाजी महाराज थक गए थे': धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान से महाराष्ट्र में भड़का गुस्सा, जूतों-चप्पलों से विरोध!

नागपुर में 25 अप्रैल को आरएसएस से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार युद्धों से थक गए थे। उन्होंने समर्थ रामदास स्वामी के पास जाकर अपना मुकुट उतारकर रख दिया।
छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए बयान के बाद लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ जगहों पर उनकी तस्वीरों पर कालिख पोती गई और जूते-चप्पल फेंके गए।
छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए बयान के बाद लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ जगहों पर उनकी तस्वीरों पर कालिख पोती गई और जूते-चप्पल फेंके गए।सोशल मीडिया
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नागपुर/मुंबई- बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यानी बागेश्वर बाबा के छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए बयान ने महाराष्ट्र में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। शिवाजी समर्थक संगठनों, संभाजी ब्रिगेड और स्थानीय लोगों ने नागपुर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए। कुछ जगहों पर शास्त्री की तस्वीरों पर जूते-चप्पल फेंके गए और नारेबाजी हुई, जो उनके बयान के प्रति गहरे आक्रोश को दर्शाता है।

नागपुर में 25 अप्रैल को आरएसएस से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार युद्धों से थक गए थे। उन्होंने समर्थ रामदास स्वामी के पास जाकर अपना मुकुट उतारकर रख दिया और कहा कि अब वे युद्ध नहीं लड़ना चाहते, राज्य की जिम्मेदारी संभाल लीजिए, वे आराम करना चाहते हैं। रामदास स्वामी ने मुकुट लौटाकर उन्हें जिम्मेदारी निभाने की सलाह दी।

उन्होंने इसी कार्यक्रम में हिंदू परिवारों से अपील की कि चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित करें। यह बयान भी चर्चा में रहा। यह घटना नागपुर के एक कार्यक्रम में हुई, जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। बयान वायरल होने के बाद महाराष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुंची, क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज यहां हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक माने जाते हैं।

विरोध बढ़ने के बाद 26 अप्रैल को धीरेंद्र शास्त्री ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर “गहरा खेद” जताया और माफी मांगी। उन्होंने कहा: “छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करना तो दूर, मैं सपने में भी किसी को उनकी आलोचना करते नहीं देख सकता। बयान को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया; मेरा उद्देश्य शिवाजी महाराज की संतों (रामदास स्वामी) के प्रति श्रद्धा और महानता दिखाना था।"

संभाजी ब्रिगेड और स्थानीय लोगों में शास्त्री के इस बयान को लेकर गहरा आक्रोश फ़ैल गया, उनके खिलाफ नारेबाजी की गयी। कुछ जगहों पर उनकी तस्वीरों पर कालिख पोती गई और जूते-चप्पल फेंके गए। माफी के बावजूद विरोध जारी है। बहुजन समुदायों में भी शास्त्री के इस बयान को लेकर काफी आक्रोश है।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन वसंतराव सपकाल ने इसे शिवाजी महाराज का अपमान बताया और कहा कि शिवाजी व रामदास स्वामी अलग-अलग कालखंडों से हैं; इसे इतिहास विकृत करने की कोशिश बताया। उन्होंने फडणवीस, गडकरी और मोहन भागवत (जो कार्यक्रम में मौजूद थे) से माफी की मांग की। शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने भी भाजपा-आरएसएस की चुप्पी पर सवाल उठाए। रितेश देशमुख जो शिवाजी पर फिल्म बना रहे हैं, ने भी बयान को “बकवास” बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस कथन का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है; यह लोककथाओं जैसा लगता है।

सोशल मीडिया और सड़कों पर भी आलोचकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई जगहों पर जुलूस निकाले गए और “शिवाजी महाराज का अपमान बर्दाश्त नहीं” जैसे नारे लगे।

छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए बयान के बाद लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ जगहों पर उनकी तस्वीरों पर कालिख पोती गई और जूते-चप्पल फेंके गए।
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छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए बयान के बाद लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ जगहों पर उनकी तस्वीरों पर कालिख पोती गई और जूते-चप्पल फेंके गए।
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