Constitutional Wedding | ना फेरे-ना कसमें: नये साल के पहले दिन केरल में इस जोड़े ने रचाया ऐसा अनोखा विवाह

दम्पति ने बताया कि संविधान साक्षरता परिषद के अन्य सदस्यों से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी शादी को संविधान प्रचार का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा, "हम उप-पंजीयक कार्यालय में ही विवाह करने का फैसला इसलिए ले चुके थे ताकि लोग सरल और बिना फिजूलखर्ची वाले आयोजनों को अपनाएं।"
 गुरुवार को नेनमारा उप-पंजीयक कार्यालय में यह अनोखा विवाह समारोह देखने को मिला।
शीतल और जितिन ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी रचाई, लेकिन पारंपरिक रीति-रिवाजों की जगह उन्होंने भारतीय संविधान की प्रतियां आदान-प्रदान कीं। द हिन्दू
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पालक्काड़- ना कन्यादान की रस्म नहीं, न वाद्य यंत्रों की गूंज, ना ही सप्तपदी का फेरा। सिर्फ संविधान की पवित्र प्रतियों का आदान-प्रदान कर, नए साल के सूरज के साथ एक अनोखा विवाह चमका। केरल के पालक्काड़ के नेनमारा में शीतल और जितिन ने इतिहास रचा, जहाँ संवैधानिक मूल्यों से बंधा दांपत्य सादगी का अनमोल उपहार बन गया।

गुरुवार को नेनमारा उप-पंजीयक कार्यालय में यह अनोखा विवाह समारोह देखने को मिला। शीतल और जितिन ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी रचाई, लेकिन पारंपरिक रीति-रिवाजों की जगह उन्होंने भारतीय संविधान की प्रतियां आदान-प्रदान कीं। यह 'संविधानिक विवाह' न केवल सरलता का प्रतीक था, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को अपनाने का संदेश भी दे गया।

इस अनोखे समारोह में जोड़े ने संविधान की प्रस्तावना से प्रेरित एक विवाह प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किए, जो उनके दांपत्य जीवन को संवैधानिक आदर्शों से जोड़ने का प्रतीक बना। शादी में कोई भव्य आयोजन या रस्में नहीं थीं, सिर्फ संविधान की किताबें और सरलता का जश्न मना। शीतल और जितिन ने समारोह के बाद कहा, "हम चाहते थे कि हमारी शादी संविधान के आदर्शों को प्रतिबिंबित करे और सादगी का उत्सव मनाए। हमारा यह फैसला परिवार से ही संवैधानिक मूल्यों की शुरुआत करने का प्रयास है।"

द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार जितिन पालक्काड़ के अयलूर के निवासी हैं और तेंकूरिस्सी ग्राम-1 में ग्राम सहायक के रूप में कार्यरत हैं वहीं, शीतल कोल्लम जिले के करुणागप्पल्ली से हैं और कन्नड़ी उच्च माध्यमिक स्कूल में शिक्षिका हैं। शीतल पहले कोल्लम जिला पंचायत के 'सिटिजन-2022' प्रोजेक्ट में संविधान प्रशिक्षक के रूप में काम कर चुकी हैं, जिसने कोल्लम को भारत का पहला पूर्ण संविधान-साक्षर जिला घोषित किया था। वे राज्यव्यापी संविधान साक्षरता परिषद की सक्रिय सदस्य भी हैं, जो संवैधानिक जागरूकता फैलाने का काम करती है।

दम्पति ने बताया कि संविधान साक्षरता परिषद के अन्य सदस्यों से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी शादी को संविधान प्रचार का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा, "हम उप-पंजीयक कार्यालय में ही विवाह करने का फैसला इसलिए ले चुके थे ताकि लोग सरल और बिना फिजूलखर्ची वाले आयोजनों को अपनाएं।"

समारोह में नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हुए संविधान साक्षरता परिषद की अध्यक्ष नसीम खान ने कहा, "यह समारोह समाज को एक बड़ा संदेश देता है कि पारिवारिक संबंध संविधान में निहित नैतिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होने चाहिए।" खान के साथ कार्यकारी सदस्य एम.ए. रसीना ने भी जोड़े को संविधान की प्रतियां भेंट कीं। उपयुक्त समापन के रूप में समारोह राष्ट्रीय गान के साथ संपन्न हुआ।

 गुरुवार को नेनमारा उप-पंजीयक कार्यालय में यह अनोखा विवाह समारोह देखने को मिला।
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