
जयपुर: राजस्थान दिवस समारोह के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 16 मार्च को डूंगरपुर स्थित बेणेश्वर धाम के दौरे पर जाने वाले हैं, लेकिन उनका यह प्रस्तावित कार्यक्रम अब भारी विरोध का सामना कर रहा है। आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़े विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस दौरे के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया है। आदिवासी समुदाय के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके अधिकारों और आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्य सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक वे इस दौरे का पुरजोर विरोध करेंगे।
विरोध कर रहे इन संगठनों की सबसे प्रमुख मांग 'मानगढ़ धाम' को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की है, जो दक्षिणी राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के आदिवासियों की एक बहुत पुरानी मांग रही है। इसके साथ ही, इन समूहों ने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षण के दायरे को 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की भी दृढ़ मांग रखी है।
आदिवासियों के इस आंदोलन को ओबीसी संगठनों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। ओबीसी वर्ग का कहना है कि उन्हें भी आदिवासी क्षेत्रों में गैर-आदिवासी क्षेत्रों के समान ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम पर बांसवाड़ा के सांसद राजकुमार रोत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासी समाज को मौजूदा भाजपा सरकार से बहुत कम उम्मीदें हैं, लेकिन वे अपनी भावनाओं और हकों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं होने देंगे।
सांसद रोत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी मुख्यमंत्री आदिवासी बहुल इलाकों के दौरे पर आते हैं, तो वे अपनी कॉरपोरेट मित्रों के साथ आते हैं जिनकी नजर हमारी जमीनों पर होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होना है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय उनकी पार्टी के विधायक स्वयं करेंगे।
राज्य सरकार के कामकाज को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। रबारी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष महेंद्र देसाई रबारी ने बताया कि असंतोष के कारण कई इलाकों में चुनाव के बहिष्कार का आह्वान करने वाले पोस्टर और बैनर पहले से ही चस्पा कर दिए गए हैं। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जगह-जगह बैनर लगाकर आम जनता से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का बहिष्कार करने की अपील की जा रही है।
कई संगठनों ने तो प्रशासन को खुली चेतावनी दे दी है कि अगर मानगढ़ धाम को मान्यता देने और आदिवासी आरक्षण को बढ़ाने जैसी उनकी अहम मांगों को अनसुना किया गया, तो वे आगामी चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे।
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