लेह पहुंचे बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष, दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

लद्दाख के लेह में पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों का दर्शन, 2 से 10 मई तक जीवेतसल में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब।
Piprahwa relics Ladakh
लेह में पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष पहुंचे हैं। 2 से 10 मई तक जीवेतसल में आम जनता के लिए भव्य दर्शन।Photo credit: X/@lg_ladakh
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नई दिल्ली: बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों का लेह पहुंचने पर पूरे हर्षोल्लास के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का गवाह बनने के लिए स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर अपनी गहरी श्रद्धा प्रकट की।

हवाई अड्डे के तकनीकी क्षेत्र में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नई दिल्ली से लाए गए इन पवित्र अवशेषों की औपचारिक अगवानी की। भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान के जरिए माथो मठ के द्रुकपा थुकसे रिनपोछे और खेंपो थिनलास चोसल इन्हें लेकर लेह पहुंचे हैं।

स्वागत समारोह में लद्दाख की समृद्ध बौद्ध विरासत की स्पष्ट झलक देखने को मिली। धार्मिक गुरुओं और सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में पारंपरिक प्रस्तुतियां दी गईं और पवित्र अनुष्ठान संपन्न हुए। लद्दाख पुलिस ने इस मौके पर गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया, जबकि बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं। उपराज्यपाल ने भी लद्दाख की जनता की ओर से 'खताक' और प्रार्थनाएं अर्पित कीं।

Buddha Relics in Leh
लेह पहुंचे भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषPhoto credit: X/@lg_ladakh

इसके बाद इन पवित्र अवशेषों को एक विशाल शोभायात्रा के रूप में सार्वजनिक दर्शन के लिए निर्धारित स्थल 'जीवेतसल' ले जाया गया। शोभायात्रा के मार्ग में पारंपरिक परिधानों में सजे हजारों श्रद्धालु कतारों में खड़े थे। बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष हाथ जोड़े और गुलदस्ते लिए शांतिपूर्वक भगवान बुद्ध के दर्शन का इंतजार कर रहे थे।

एक मई को बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर इन अवशेषों के सार्वजनिक दर्शन की शुरुआत होगी। जीवेतसल में 2 मई से 10 मई तक आम लोग इनके दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद 11 और 12 मई को इन्हें जांस्कर ले जाया जाएगा। फिर 13 से 14 मई तक लेह के धर्म केंद्र में दर्शन की व्यवस्था होगी, जिसके बाद 15 मई को ये अवशेष दिल्ली वापस लौट जाएंगे।

इस भव्य स्वागत के अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें खमटक रिनपोछे, रिग्याल रिनपोछे, लद्दाख गोनपा एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रद्धेय दोर्जे स्टैनज़िन और लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष चेरिंग दोर्जे लाक्रुक शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग व जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, एलएएचडीसी के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद ताशी ग्यालसन और विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

पिपरहवा अवशेष वास्तव में गौतम बुद्ध से जुड़ी प्राचीन पवित्र वस्तुएं हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश में नेपाल सीमा के पास स्थित पुरातात्विक स्थल पिपरहवा से खोजा गया था। हाल ही के वर्षों में इनका वैश्विक महत्व और भी बढ़ गया है। विशेष रूप से जुलाई 2025 में जब एक ब्रिटिश परिवार और निजी संग्रह से इनसे जुड़े रत्नों और भेंटों को वापस भारत लाया गया, जिससे सदी से भी अधिक पुराने औपनिवेशिक कब्जे का अंत हो सका।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस क्षण को बेहद शुभ बताते हुए कहा कि इन अवशेषों के आगमन से पूरा लद्दाख धन्य हो गया है। उन्होंने बताया कि भले ही अतीत में थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में इनका अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन किया जा चुका है, लेकिन यह पहली बार है जब भारत के भीतर सार्वजनिक दर्शन के लिए इन्हें इनके मूल संरक्षण स्थान से बाहर लाया गया है।

इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए लद्दाख को चुनने पर उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे भगवान बुद्ध का आशीर्वाद लेने के लिए भारी संख्या में इस आयोजन का हिस्सा बनें।

दर्शन अवधि के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ अन्य केंद्रीय मंत्रियों और राजदूतों के भी लेह आने की उम्मीद है। इनके अलावा बौद्ध बहुल राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि भी इस दौरान दर्शन के लिए पहुंचेंगे।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पूरे लेह में व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। उपराज्यपाल के निर्देश पर शहर भर में सौंदर्यीकरण, पौधारोपण, गमले लगाने और साफ-सफाई के विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि आने वाले लोगों को एक सुगम और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव प्राप्त हो सके।

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