बीएचयू में आरक्षण विवाद के चलते 39 नर्सिंग अफसरों का प्रमोशन रद्द, डिमोशन से कर्मचारियों में भारी रोष

एससी/एसटी आयोग के निर्देश के बाद बीएचयू (BHU) प्रशासन ने जारी की संशोधित लिस्ट, सामान्य और ओबीसी वर्ग के 39 नर्सिंग अफसरों को किया गया डिमोट, कर्मचारियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) फोटो साभार- इन्टरनेट
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वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। इस साल की शुरुआत में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर प्रमोट किए गए 39 कर्मचारियों को फिर से उनके पुराने पद (नर्सिंग ऑफिसर) पर वापस भेज दिया गया है। यह कार्रवाई आरक्षण नियमों के पालन को लेकर उठी आपत्तियों के बाद एक संशोधित प्रमोशन सूची जारी होने के चलते की गई है।

वहीं, अचानक हुए इस डिमोशन से नाराज कर्मचारियों ने बिना किसी वैध कारण के पदावनत (डिमोशन) करने का आरोप लगाते हुए फैसले की समीक्षा की मांग उठाई है।

इस विवाद की पृष्ठभूमि 3 जनवरी को तैयार हुई थी। उस समय रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से एक प्रमोशन लिस्ट जारी की गई थी, जिसके जरिए सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत 195 नर्सिंग अधिकारियों को पदोन्नत करके सीनियर नर्सिंग ऑफिसर बनाया गया था।

प्रमोशन की इस प्रक्रिया के कुछ समय बाद ही कुछ नर्सिंग अधिकारियों ने एससी/एसटी आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि इस पूरी प्रक्रिया में आरक्षण के तय नियमों की अनदेखी की गई है। इस गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया।

आयोग के इसी निर्देश के बाद 27 मई को विश्वविद्यालय ने प्रमोशन कमेटी की एक और बैठक बुलाई। इस बैठक में की गई सिफारिशों के आधार पर हाल ही में एक नई और संशोधित प्रमोशन लिस्ट जारी की गई। इस नई सूची का सीधा असर सामान्य और ओबीसी वर्ग के उन 39 नर्सिंग अफसरों पर पड़ा, जिनका प्रमोशन रद्द कर दिया गया और उन्हें वापस उनके पुराने पद पर डिमोट कर दिया गया।

प्रमोशन छिन जाने से प्रभावित कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा आरोप है कि यह संशोधित आदेश भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के दिशानिर्देशों और वैधानिक आरक्षण रोस्टर का खुला उल्लंघन है। इन कर्मचारियों ने पुरजोर मांग की है कि जब तक एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष समिति द्वारा इस पूरी प्रक्रिया की गहन समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक इस नई सूची के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

इस पूरे विवाद पर आईएमएस (IMS) के निदेशक प्रोफेसर एसएन शंखवार ने विश्वविद्यालय का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि प्रमोशन की यह प्रक्रिया पूरी तरह से विश्वविद्यालय के नियमों के तहत ही संपन्न कराई गई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि प्रभावित नर्सिंग अधिकारियों की ओर से कोई भी औपचारिक प्रतिवेदन प्राप्त होता है, तो चिकित्सा अधीक्षक के साथ विचार-विमर्श करके पूरे मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

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