बेलगावी कांड: दलित महिला को निर्वस्त्र घुमाने के मामले में 12 दोषियों को 5 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- यह दुर्योधनों और दुशासन की दुनिया है

कर्नाटक के बेलगावी में 42 वर्षीय महिला के साथ हुई बर्बरता पर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, हाई कोर्ट ने की थी 'महाभारत' से तुलना, जानें पूरा मामला।
Belagavi Dalit Woman Case
दलित महिला को निर्वस्त्र घुमाने वाले 12 दोषियों को 5 साल की जेल(Ai Image)
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बेलगावी/कर्नाटक: मानवता को शर्मसार कर देने वाली बेलगावी की उस घटना ने न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें एक दलित महिला को निर्वस्त्र कर घुमाया गया था। अब इस दिल दहला देने वाले मामले में न्याय की जीत हुई है। बेलगावी की एक स्थानीय अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस बर्बरता में शामिल 12 लोगों को दोषी करार दिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह भयावह घटना कर्नाटक के बेलगावी जिले के वंटमुरी गांव से सामने आई थी। 10 दिसंबर, 2023 की वो तारीख, जब इंसानियत तार-तार हुई थी। पीड़ित 42 वर्षीय महिला के बेटे ने गांव की ही एक लड़की के साथ प्रेम विवाह (भागकर शादी) कर लिया था। इसी बात से नाराज लड़की के परिवार वालों ने बदला लेने के लिए लड़के की मां को निशाना बनाया।

आरोप है कि हमलावरों ने महिला को उसके घर से घसीटकर बाहर निकाला, उसे निर्वस्त्र किया और पूरे गांव में घुमाया। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; उसे बिजली के खंभे से बांधा गया और बेरहमी से पीटा गया।

12 दोषियों को 5 साल की कठोर कैद

इस मामले की सुनवाई करते हुए 10वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एच.एस. मंजूनाथ ने सभी 12 आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने उन्हें 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, दोषियों को 12 अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है और प्रत्येक धारा के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

दोषी करार दिए गए लोगों के नाम

अदालत ने जिन लोगों को सजा सुनाई है, उनकी पहचान बसप्पा नायक, राजू नायक, केम्पन्ना नायक, पार्वती नायक, यल्लव्वा नायक, लक्कप्पा नायक, गंगव्वा, संगीता हेग्गनायक, संतोष नायक, शोभा नायक, लक्कव्वा नायक और शिवप्पा वन्नूर के रूप में हुई है।

फैसला आते ही कोर्ट परिसर में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सजा सुनने के बाद दोषी कोर्ट रूम के अंदर ही रो पड़े, वहीं बाहर मौजूद उनके परिजन भी भावुक हो गए और रोने लगे।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "महाभारत में भी ऐसा नहीं हुआ था"

इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। कर्नाटक हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग की विफलता पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। तत्कालीन चीफ जस्टिस पी.बी. वराले और जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित की खंडपीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज की थी।

हाई कोर्ट की टिप्पणी थी कि:

"सोचिए, दूसरी महिलाओं के मन में कितना डर होगा। वे इस देश में खुद को असुरक्षित महसूस करेंगी। ऐसी घटना तो महाभारत काल में भी नहीं हुई थी। द्रौपदी के पास तो भगवान कृष्ण थे जो उनकी रक्षा के लिए आए, लेकिन आधुनिक दुनिया में इस महिला की मदद के लिए कोई नहीं आया। दुर्भाग्य से, यह दुर्योधनों और दुशासनों की दुनिया है।"

अदालत ने यह भी नोट किया कि जहां कुछ ग्रामीणों ने अपराध को रोकने की कोशिश की, वहीं अधिकांश लोग मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर

यह घटना उस समय हुई थी जब बेलगावी में कर्नाटक विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा था। इसने सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी की स्थिति पैदा कर दी थी।

हालांकि, बाद में कर्नाटक पुलिस ने उन पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों को सम्मानित किया जिन्होंने साहस दिखाते हुए महिला को बचाने का प्रयास किया था। पीएसआई मंजूनाथ हुलाकिया और पांच अन्य पुलिसकर्मियों को भी तुरंत मौके पर पहुंचने और कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, पीड़ित परिवार को मदद के तौर पर राज्य सरकार ने दो एकड़ जमीन आवंटित की है।

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