अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश: 10 से 50 हजार में बेचे गए 19 मासूम बच्चे रेस्क्यू, 3 महिला दलाल गिरफ्तार

अच्छी शिक्षा का लालच देकर गरीब परिवारों से छीने गए मासूम, घरों और होटलों में बाल मजदूरी के लिए 10 से 50 हजार रुपये में हुआ था सौदा।
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अरुणाचल प्रदेश में बड़े बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश। 10-50 हजार में बेचे गए 19 मासूम बच्चे रेस्क्यू, 3 महिला दलाल गिरफ्तार।(Ai इमेज)
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अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने एक बड़े बाल तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 19 मासूम बच्चों को रेस्क्यू किया है। इस गंभीर मामले में पुलिस ने मंगलवार, 25 अगस्त को तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर इन बच्चों की तस्करी और खरीद-फरोख्त में शामिल थीं।

इस रैकेट का शिकार बने सभी बच्चों की उम्र आठ साल से भी कम है। तस्करों ने गरीब माता-पिता को उनके बच्चों की अच्छी शिक्षा और बेहतर देखभाल का झूठा लालच दिया था। लेकिन इन मासूमों को पढ़ाई के बजाय घरों और होटलों में नौकरों की तरह काम में धकेल दिया गया।

नामसाई जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सांगे थिनले ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की नामसाई इकाई ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर बीते 17 अगस्त को मामला दर्ज कर इस बाल तस्करी नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की गई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) केंगो दिर्ची के नेतृत्व में इस टीम ने राज्य भर में छापेमारी की। टीम ने शि-योमी जिले के मेचुखा, पश्चिम सियांग के आलो, पूर्वी सियांग के पासीघाट, लोंगडिंग के अलावा राज्य की जुड़वां राजधानियों ईटानगर और नाहरलगुन से इन बच्चों को ढूंढ निकाला।

इस पुलिसिया कार्रवाई के दौरान एसआईटी ने गुमण्या कोचंग, मार्ता एते और नेहा गेरोरी को गिरफ्तार किया है। ये तीनों महिलाएं दलाल के रूप में काम कर रही थीं। इनका मुख्य काम होटलों, रेस्तरां और घरों में बाल मजदूरी के लिए बच्चों की तलाश कर रहे लोगों तक इन मासूमों को पहुंचाना था।

पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले ने इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती बातचीत में कुछ बच्चे इतने सहमे हुए थे कि उन्हें अपने माता-पिता का नाम और परिवार की बुनियादी जानकारी तक याद नहीं थी। जब इन बच्चों की पहली बार सौदेबाजी हुई थी, तब उनमें से सबसे छोटे बच्चे की उम्र महज तीन साल थी।

नामसाई पुलिस के बयान के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि तस्करों के निशाने पर मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार थे। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर उन्हें उनके परिजनों से दूर ले जाया गया और फिर अंजान लोगों के पास काफी दूर-दराज के इलाकों में भेज दिया गया।

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हर एक बच्चे के लिए 10,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की रकम चुकाई गई। कुछ मामलों में तो बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों को भी पैसे दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति की व्यक्तिगत भूमिका की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।

बचाए गए सभी 19 बच्चों की जरूरी मेडिकल जांच पूरी कर ली गई है। बाल संरक्षण प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए उन्हें संबंधित जिलों की सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया। फिलहाल, कानून के अनुसार एक बाल-सुलभ और संवेदनशील प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

दूसरी तरफ, एसआईटी इस पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचने में जुटी है। पुलिस टीम वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बच्चों की आवाजाही का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। मकसद यह है कि दलालों, खरीदारों और अन्य आरोपियों के बीच की पूरी कड़ी को जोड़कर उनके खिलाफ अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।

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