तमिलनाडु में 'ऑनर किलिंग': अमीरी-गरीबी की खाई ने ली 23 वर्षीय दलित युवक की जान, TVK के नेता पर आरोप

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में 'ऑनर किलिंग' का मामला: आर्थिक असमानता के चलते सत्तारूढ़ दल के नेता पर 23 वर्षीय दलित युवक की बेरहमी से हत्या का आरोप।
Dalit youth Praveen.
तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में 23 वर्षीय दलित युवक की बेरहमी से हत्या। टीवीके नेता पर 'ऑनर किलिंग' का आरोप।Social Media - X
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तमिलनाडु: चेंगलपट्टू जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां झूठी शान यानी 'ऑनर किलिंग' के शक में 23 वर्षीय एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।

मृतक युवक का नाम प्रवीण था, जो चेंगलपट्टू के केलमबक्कम का रहने वाला था। बीती 16 अगस्त की रात को हमलावरों ने प्रवीण पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया। इस हिंसक घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बाद उसे चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 20 अगस्त को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस हत्याकांड में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनकी पहचान मणिकंदन, एझुमलाई, नंदीश और गौतम के रूप में हुई है। सभी को 17 अगस्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल प्रशासन और पुलिस पांचवें फरार आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रहे हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य आरोपी एझुमलाई सत्तारूढ़ पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (टीवीके) का सदस्य है। बताया जा रहा है कि एझुमलाई की बेटी अश्वथी और प्रवीण के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। मृतक के एक पड़ोसी सतीश कुमार ने बताया कि प्रवीण और एझुमलाई दोनों ही अनुसूचित जाति (आदि द्रविड़) समुदाय से ताल्लुक रखते थे। हालांकि प्रवीण का परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था और यही अमीरी-गरीबी का फासला इस हत्या की मुख्य वजह बना।

यह हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। इससे पहले भी अश्वथी के परिवार वालों ने प्रवीण को कई बार जान से मारने की धमकियां दी थीं। पड़ोसी सतीश के अनुसार, एक बार अश्वथी का एक रिश्तेदार हथियार लेकर प्रवीण के घर आ धमका था। उसने प्रवीण पर चाकू से हमला करने की कोशिश की और चीखते-चिल्लाते हुए धमकियां देकर वहां से चला गया था।

इतना ही नहीं, करीब छह महीने पहले भी प्रवीण के साथ दरिंदगी की गई थी। उस वक्त एझुमलाई और अन्य आरोपियों ने प्रवीण को रस्सियों से बांधकर बुरी तरह पीटा था। हालांकि, उस समय विवाद बढ़ने के डर से प्रवीण के परिवार ने पुलिस में कोई मामला दर्ज नहीं कराने का फैसला किया था।

आरोप है कि, इस निर्मम हत्या को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया। आरोपियों में से एक मणिकंदन ने करीब तीन महीने पहले प्रवीण से दोस्ती बढ़ाई थी। हत्या वाले दिन 16 अगस्त को प्रवीण उसी मणिकंदन से मिलने गया था। तभी उसे एक कार में अगवा कर लिया गया और किसी दूसरी जगह ले जाकर उस पर घातक हमला किया गया।

इस घटना ने एक बार फिर राज्य में 'ऑनर किलिंग' के खिलाफ कड़े कानूनों की मांग को तेज कर दिया है। जाति विरोधी कार्यकर्ताओं के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। केवल तमिलनाडु में ही जनवरी से मार्च 2026 के बीच ऑनर किलिंग के 59 मामले दर्ज किए गए हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम ऐसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऑनर किलिंग के पीछे केवल जातिगत श्रेष्ठता ही नहीं, बल्कि वर्ग, धर्म और लैंगिक पहचान भी अहम भूमिका निभाते हैं। प्रवीण के मामले की तरह, जब हत्यारे और पीड़ित दोनों एक ही दलित समुदाय से हों, तो एससी/एसटी एक्ट लागू करना कानूनी रूप से मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं ने बताया कि ईसाई या मुस्लिम दलितों को भी इस कानून के तहत संरक्षण नहीं मिलता क्योंकि उन्हें अनुसूचित वर्ग के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

जाति विरोधी कार्यकर्ता और लेखिका शालिन मारिया लॉरेंस ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि दलित समुदायों के भीतर होने वाली ऑनर किलिंग ज्यादातर आर्थिक स्थिति या वर्ग पर आधारित होती है। उन्होंने इन हमलों को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 'श्रेणीबद्ध असमानता' (graded inequality) के नजरिए से समझने की जरूरत बताई है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि प्रवीण की हत्या दर्शाती है कि कैसे उत्पीड़ित समुदायों के भीतर भी जाति, वर्ग और पितृसत्ता आपस में टकराते हैं। दो लोग भले ही एक ही जाति के हों, लेकिन उनका सामाजिक या आर्थिक स्तर अलग हो सकता है। ऐसे में परिवार की 'शान' का दावा उन लोगों के खिलाफ एक हथियार बन जाता है जो इन सीमाओं को पार करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवीण को इसलिए मार दिया गया क्योंकि किसी को लगा कि उनके परिवार की शान, उस युवक के जीने और प्यार करने के अधिकार से ज्यादा बड़ी है। यह समाज में गहराई तक पैठी असमानता और क्रूरता का सबसे भयानक रूप है।

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