आंध्र प्रदेश: पुलिस हिरासत में मौत के आरोप में गिरफ्तार इंस्पेक्टर की मुश्किलें बढ़ीं, दलित युवक की आत्महत्या मामले में भी SIT कर रही जांच

विजयवाड़ा पुलिस हिरासत में मौत मामले में गिरफ्तार इंस्पेक्टर एस.वी. नागराजू पर दलित युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने का भी गंभीर आरोप, एसआईटी कर रही है परत-दर-परत जांच।
पुलिस हिरासत
पुलिस हिरासत (सांकेतिक तस्वीर)
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आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में गिरफ्तार किए गए सर्किल इंस्पेक्टर एस. वी. नागराजू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उनके खिलाफ एक और बेहद गंभीर मामले की जांच शुरू हो गई है। नागराजू पर आरोप है कि उनकी प्रताड़ना से तंग आकर 42 वर्षीय दलित युवक पेरुगोगु क्रांति कुमार ने आत्महत्या कर ली थी।

पेरुगोगु क्रांति कुमार ने 21 मई को अपनी जान दे दी थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कृष्णालंका पुलिस स्टेशन के सर्किल इंस्पेक्टर नागराजू को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था। क्रांति, आंध्र मदीगा रिजर्वेशन पोराटा समिति के अध्यक्ष पेरुगोगु वेंकटेश्वर राव के बेटे थे। अपने आखिरी वीडियो में क्रांति ने यह संगीन आरोप लगाया था कि एक दलित होने के कारण इंस्पेक्टर नागराजू उन्हें जानबूझकर निशाना बना रहे थे।

दूसरी ओर, गाडे साई कृष्णा की कथित कस्टोडियल डेथ (पुलिस हिरासत में मौत) और क्रांति की आत्महत्या की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। बुधवार को विजयवाड़ा की द्वितीय अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट (एजेएम) अदालत में एसआईटी ने इंस्पेक्टर नागराजू की रिमांड अर्जी दाखिल की। इस रिमांड रिपोर्ट में एसआईटी ने बताया है कि शुरुआती साक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पुलिस हिरासत के दौरान साई कृष्णा को गंभीर यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।

जांच दल ने अदालत को यह भी बताया कि इस जघन्य अपराध से जुड़े सबूतों को या तो छिपाया गया या फिर उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

अपने सुसाइड वीडियो में क्रांति ने बताया था कि कृष्णालंका पुलिस स्टेशन में दर्ज छोटे-मोटे मामलों की आड़ में इंस्पेक्टर नागराजू उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे और उनके साथ कई बार बेरहमी से मारपीट भी की गई थी। मदीगा समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन के प्रमुख और क्रांति के पिता वेंकटेश्वर राव ने बताया कि 21 मई को एक कांस्टेबल किसी जानकारी के सिलसिले में उनके घर आया था। इसके बाद क्रांति पुलिस की मंशा को लेकर काफी खौफ में था और कुछ ही घंटों बाद उसने आत्महत्या कर ली।

पिता राव ने यह भी बताया कि पुलिस के लगातार चक्कर काटने और दर्ज मुकदमों के कारण क्रांति भारी मानसिक दबाव में था, जिसके चलते उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी।

हालांकि, पुलिस सूत्रों का इस पूरे मामले में एक अलग ही दावा है। पुलिस के अनुसार, पिछले छह वर्षों में कृष्णालंका और विजयवाड़ा थ्री टाउन पुलिस स्टेशनों में क्रांति के खिलाफ गांजा तस्करी, डराने-धमकाने और जबरन वसूली से जुड़े कम से कम 10 आपराधिक मामले दर्ज थे। एक तरफ जहां पिता वेंकटेश्वर राव इन सभी मुकदमों को फर्जी बता रहे हैं, वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि विजयवाड़ा इलाके में ड्रग्स सप्लाई के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए क्रांति से पूछताछ करना बहुत जरूरी था।

क्रांति की मौत के बाद उनके पिता ने कृष्णालंका थाने में बकायदा शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में सर्किल इंस्पेक्टर नागराजू का नाम तब और ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब कस्टडी के दौरान साई कृष्णा के 'लापता' होने का मामला उजागर हुआ। इसके बाद क्रांति के पिता की पार्टी और विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने क्रांति का वीडियो वायरल कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए साई कृष्णा की मौत की जांच कर रही एसआईटी को क्रांति की मौत की जांच का जिम्मा भी सौंप दिया गया।

निलंबित चल रहे सर्किल इंस्पेक्टर नागराजू को मंगलवार को एसआईटी ने विजयवाड़ा के एक गेस्ट हाउस से धर दबोचा। उनकी यह गिरफ्तारी उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होने के पांच दिन बाद हुई है। दरअसल, डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करने वाले साई कृष्णा की मां जी. विजयलक्ष्मी ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विजयवाड़ा पुलिस को कृष्णा को कोर्ट में पेश करने का सख्त निर्देश दिया था।

मामले के तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पुलिस से पूरी रिपोर्ट तलब की और 21 जून को इस कथित कस्टोडियल डेथ की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन कर दिया।

एसआईटी अब इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि क्या पुलिस ने साई कृष्णा के शव का अंतिम संस्कार एक अज्ञात शव के रूप में कर दिया था। जांच में यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई है कि तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए कृष्णालंका पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे कई हफ्तों से बंद पड़े थे।

बुधवार को नागराजू की कस्टडी मांगते हुए एसआईटी ने अपनी रिमांड रिपोर्ट में कई अहम और सनसनीखेज खुलासे किए। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 मई को कृष्णालंका पुलिस स्टेशन की एक टास्क फोर्स टीम ने साई कृष्णा को गिरफ्तार करके नागराजू के हवाले किया था। कृष्णा को दो गैर-जमानती वारंट के चलते हिरासत में लिया गया था।

नियम के मुताबिक नागराजू ने उसे 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश नहीं किया। कई गवाहों ने पुलिस स्टेशन में कृष्णा को देखने की बात कुबूली है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हिरासत में उसकी मौत होने के बाद उसके शव को खुर्द-बुर्द कर दिया गया।

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