
लखनऊ/अमेठी: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले स्थित नरहरपुर गांव में उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब प्रशासन ने सार्वजनिक जमीन से डॉ. बीआर अंबेडकर की एक प्रतिमा और उसके चबूतरे को हटा दिया। अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। इस हिंसक झड़प में चार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रशासन ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए 64 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
यह पूरा विवाद एक ऐसी जमीन को लेकर शुरू हुआ था, जिसे सरकारी दस्तावेजों में मृत जानवरों के निस्तारण के लिए आरक्षित रखा गया था। आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों ने इसी जमीन पर एक चबूतरा बनाकर वहां अंबेडकर जी की मूर्ति स्थापित कर दी। जब इसकी शिकायत राजस्व विभाग तक पहुंची, तो एक टीम ने मौके पर जाकर सर्वेक्षण किया। जांच में यह निर्माण पूरी तरह से अवैध पाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने चबूतरे को ढहा दिया और प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया।
शनिवार को इस मामले ने उस समय फिर से तूल पकड़ लिया, जब ग्रामीणों ने कथित तौर पर उसी जगह पर दोबारा मूर्ति स्थापित कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) कृष्ण मोहन सिंह पुलिस और राजस्व अधिकारियों की टीम के साथ गांव पहुंचे। टीम अपने साथ एक अर्थ मूवर (जेसीबी) भी लेकर गई थी, ताकि इस अतिक्रमण को तुरंत हटाया जा सके।
जैसे ही प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, ग्रामीणों की भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने पुलिस टीम पर पत्थरों से हमला कर दिया। इस अचानक हुए हिंसक पथराव में थाना प्रभारी, एक चौकी प्रभारी, एक महिला कांस्टेबल और एक अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस भीषण टकराव के दौरान कुछ ग्रामीणों को भी चोटें आई हैं।
स्थिति को नियंत्रित करने और उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) आशीष सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी आसपास के थानों की अतिरिक्त फोर्स के साथ फौरन मौके पर पहुंच गए। सभी घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
अमेठी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सरवन टी ने बताया कि इस हिंसक घटना को लेकर 14 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और अब तक कम से कम नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसपी के अनुसार, पुलिस घटना के वीडियो फुटेज खंगाल रही है ताकि उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की स्पष्ट पहचान की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिस जगह मूर्ति लगाई गई थी, वह सार्वजनिक संपत्ति है और कुछ ग्रामीणों ने उस पर अवैध कब्जा किया हुआ था।
इस पूरे विवाद में निर्माण कार्यों को लेकर वर्तमान और पूर्व ग्राम प्रधानों की भूमिका पर भी कई आरोप सामने आए हैं। हालांकि, पूर्व ग्राम प्रधान रीना कोरी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि मूर्ति स्थापना से जुड़े दस्तावेजों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। एहतियात के तौर पर पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि सार्वजनिक जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.