
कन्नूर/तिरुवनंतपुरम- केरल के कन्नूर स्थित अंजरकंडी डेंटल कॉलेज में बीडीएस प्रथम वर्ष के छात्र आर.एल छात्र नितिनराज ने 10 अप्रैल को कथित तौर पर मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या कर ली। परिवार ने जाति, रंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर लगातार मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्र ने अपने परिवार को भेजी गई वॉयस मैसेजेस में शिक्षकों द्वारा अपमान, धमकी और जातिवादी टिप्पणियों का जिक्र किया है।
10 अप्रैल को दोपहर करीब 1:30 बजे कॉलेज कैंपस में मेडिकल कॉलेज ब्लॉक के पास छात्र को गंभीर रूप से घायल हालत में पाया गया। उसे तुरंत कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शुरू में चक्करक्कल पुलिस स्टेशन में अप्राकृतिक मौत पर बीएनएस की धारा 194 के तहत मामला दर्ज किया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को परिवार को सौंपा गया और 12 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम के उझामलक्कल स्थित अंतिम संस्कार किया गया।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने कन्नूर शहर के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे नितिन राज की मौत के मामले में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करें।
परिवार ने दावा किया कि दलित समुदाय होने के कारण कॉलेज में डेंटल एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. राम और एसोसिएट प्रोफेसर के.टी. संगीता नंबियार द्वारा नितिनराज के साथ जाति आधारित गाली-गलौज, रंग पर टिप्पणियां, आर्थिक स्थिति को लेकर अपमान किया जाता रहा और वह अकादमिक उत्पीड़न का शिकार था। 12 अप्रैल को परिवार ने तीन ऑडियो क्लिप जारी कीं, जिनमें नितिन ने स्टाफ रूम में हुई घटना का जिक्र किया। क्लिप में वह कहता है कि एक शिक्षक ने उसे “idiot” कहा, मां की सर्जरी पर मजाक उड़ाया, आंतरिक अंक काटे और धमकी दी कि “अगर परिसर छोड़ा तो अंग काट दूंगा, विकलांग की तरह जीना पड़ेगा”। उसने कहा, “मैंने जितना सहन किया, किया... कल क्लास में ध्यान दे रहा था तो उन्होंने मेरी मां और उनकी सर्जरी पर टिप्पणी की।” परिवार का कहना है कि ये क्लिप्स घटना से पहले भेजी गई थीं और फोन में और भी सबूत हैं। पुलिस ने फोन जब्त किया है और इन रिकॉर्डिंग्स को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
11 अप्रैल को शाम को दोनों शिक्षकों डॉ. एम.के. राम और के.टी. संगीता नंबियार को निलंबित कर दिया गया। प्रिंसिपल डॉ. विनोद मोनी ने आंतरिक समिति गठित की। कॉलेज ने कहा कि पहले कोई शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन परिवार के आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
इधर मामले की जांच कर रही पुलिस नितिनराज से जुड़े सभी पक्षों की गहराई से छानबीन कर रही है। पुलिस को मालूम हुआ है कि दिसंबर- जनवरी में नितिनराज ने एक लोन एप से कर्ज लिया था लेकिन रकम लौटाने में चूक होने पर उसे कम्पनी से कई कॉल किये गए, कम्पनी ने 10 अप्रैल को उसके एक शिक्षक से भी इसी सिलसिले में सम्पर्क किया और पुलिस को शक है कि यह भी छात्र के लिए तनाव की एक वजह हो सकती है। कन्नूर सिटी पुलिस कमीश्नर ने कहा कि पुलिस यह अनुसंधान कर रही है कि कम्पनी को नितिनराज के टीचर के नंबर कैसे प्राप्त हुए, क्या यह नंबर लोन आवेदन प्रक्रिया के दौरान रेफरेंस के तौर पर नितिन ने ही शेयर किये थे?
अन्वेषण टीम नितिनराज से जुडी एक ऑनलाइन हनी ट्रैप केस के पहलू को भी जांच रही है, एक शिकायतकर्ता ने कुछ समय पहले उसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दी थी, यह बात भी कॉलेज प्रशासन तक पहुंची थी जिसके बाद नितिनराज ने लिखित आश्वासन दिया था कि आगे से इस प्रकार की कोई शिकायत नही होगी, बाद में शिकायतकर्ता ने मामले को ड्राप कर दिया।
नितिन की आत्महत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। उसके स्कूल के दोस्तों और टीचर्स ने हैरानी और दुख ज़ाहिर किया। नितिन के जीजा अशोकन ने मीडिया को बताया कि कॉलेज प्रशासन ने परिवार को उसकी मौत की खबर तक नहीं दी। अशोकन ने बताया, "हमें बस इतना बताया गया था कि उसे चोट लगी है। उन्होंने हमें यह नहीं बताया कि उसकी हालत गंभीर है, और उसकी मौत के बारे में भी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई।" नितिन की बहन निकिता ने कहा कि उन्हें उसकी मौत के बारे में खबरों से पता चला।
सांसद शशि थरूर ने घटना पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा, " यह घटना तिरुवनंतपुरम के एक और युवा छात्र, सिद्धार्थन की मौत की भयानक याद दिलाती है। उसकी दुखद मौत के बाद मैं उसके शोकाकुल परिवार से मिलने गया था। उसके मामले में गुंडे स्टूडेंट्स ने उसे मौत के मुँह में धकेल दिया था, जबकि एक संवेदनहीन मैनेजमेंट ने आँखें फेर ली थीं। अपराधी अलग थे, लेकिन संस्थागत विफलता का अपराध वही था।
ये कोई अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं। ये एक बुरी तरह से बीमार कैंपस संस्कृति के लक्षण हैं, एक ऐसी संस्कृति जो कमज़ोरों को अपना शिकार बनाती है और ताक़तवरों को बचाती है।
नितिन के परिवार का आरोप है कि उसकी जाति, उसके रंग और उसकी आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसका मज़ाक उड़ाया जाता था। कथित तौर पर सज़ा के तौर पर उसके इंटरनल मार्क्स काट लिए गए थे। क्लास में उसकी माँ की सर्जरी का भी मज़ाक उड़ाया गया। और जब आखिरकार उसने अपने लिए आवाज़ उठाने की हिम्मत की, तो जिस सिस्टम को उसकी रक्षा करनी चाहिए थी, वह उसे बचाने में बुरी तरह नाकाम रहा।
दो फैकल्टी सदस्यों का सस्पेंशन एक शुरुआत तो है लेकिन यह बिल्कुल भी काफ़ी नहीं है। मैं एक पूरी तरह से आपराधिक जाँच और कॉलेज प्रशासन के हर स्तर पर पूरी जवाबदेही की माँग करता हूँ। हमें कितने और सिद्धार्थनों और नितिनों की मौत का मातम मनाना पड़ेगा, इससे पहले कि केरल और भारत में अपने कैंपस को इस ज़हर से सचमुच साफ़ करने की हिम्मत जागे? हमारी संस्थाएँ सीखने और गरिमा के पवित्र स्थान होने चाहिए, न कि अपमान और मनमानी के अखाड़े। #JusticeForNithinRaj. कल नहीं। अभी।"
रविवार 12 अप्रैल को दोनों शिक्षकों पर बीएनएस धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(r) (एससी/एसटी सदस्य का सार्वजनिक अपमान) के तहत केस दर्ज किया गया। साइबर विशेषज्ञों सहित सात सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। पुलिस नितिनराज के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल्स, चैट्स और ऑडियो क्लिप्स की सत्यता की जांच कर रही है। लोन ऐप से संबंधित कॉल्स भी जांच का हिस्सा हैं, जो संभवतः मानसिक तनाव का कारण बने। पुलिस ने परिवार और छात्रों के बयान दर्ज कराए हैं।
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