नई दिल्ली: नगीना से सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले में यूट्यूबर अजीत भारती को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला बनता है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने इस याचिका को सुनवाई के अयोग्य करार दिया। जज ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत आरोपी के खिलाफ केस बनता है। इसके साथ ही अदालत ने इस अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत देने पर लगी वैधानिक रोक का हवाला देते हुए भारती की राहत की मांग को ठुकरा दिया। अदालत के इस फैसले के विस्तृत आदेश की फिलहाल प्रतीक्षा की जा रही है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने अजीत भारती के वकील, दिल्ली पुलिस और चंद्रशेखर आजाद की दलीलें सुनने के बाद 16 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाई कोर्ट का रुख करने से पहले भारती ने राहत के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने भी 7 सितंबर को उनकी अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया था कि मामले में एससी/एसटी एक्ट के तत्व साफ नजर आते हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान अजीत भारती के वकील ने दलील दी कि इस मामले में एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं होता, क्योंकि उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था। बचाव पक्ष ने कहा कि टिप्पणी के पीछे के संदर्भ को समझा जाना चाहिए। वकील का तर्क था कि भारती ने किसी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि परिवार के एक सदस्य से जुड़े उकसावे के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यूट्यूबर द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द सीधे तौर पर एक विशेष जाति का अपमान करते हैं। पुलिस ने अदालत को बताया कि ये टिप्पणियां किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की गई थीं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। आजाद के वकील ने भी पुलिस का समर्थन करते हुए इन बयानों को जानबूझकर किया गया अपमानजनक कृत्य बताया।
गौरतलब है कि चंद्रशेखर आजाद ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि अजीत भारती ने सोशल मीडिया पर उनके, दलित समुदाय और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक और जाति-आधारित बयान दिए हैं। इस शिकायत के आधार पर दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में एससी/एसटी एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
अपनी याचिका में भारती ने दलील दी थी कि सारे सबूत पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं, इसलिए हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अदालतों ने उनकी इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। वहीं, निचली अदालत ने 7 सितंबर के अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया था कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और इसका मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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