सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी को 'VIP ट्रीटमेंट', महुआ मोइत्रा ने CEC को बताया 'अपराधी'

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम के केस में रोस्टर बदलने और ऑडियो म्यूट होने पर भारी विवाद, सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर उठे सवाल।
Medha Rupam And Gyanesh Kumar
मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी मेधा रूपम के केस में सुप्रीम कोर्ट की 'म्यूट कार्यवाही' और रोस्टर बदलने से उठे गंभीर सवाल.
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नई दिल्ली: देश की न्यायपालिका और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक साथ उठे सवालों ने भारतीय राजनीति और कानूनी हलकों में भूचाल ला दिया है। एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी और नोएडा की डीएम मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट में कथित 'वीआईपी ट्रीटमेंट' मिलने पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। वहीं दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 'अपराधी' करार देते हुए उनके महाभियोग की मांग कर दी है और देश में बड़ी क्रांति की चेतावनी दी है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 24 सितंबर को 'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक बेहद गंभीर खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में मेधा रूपम से जुड़ी विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP Crl. Diary No. 56202/2026 और SLP Crl. No. 18010/2026) की लिस्टिंग के तरीके पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के तय रोस्टर के विपरीत जाकर इस मामले को विशेष रूप से एक विशिष्ट बेंच को सौंपा गया।

'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखा गया खुला पत्र.
'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखा गया खुला पत्र.

पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि याचिकाकर्ता एक लोक सेवक होने के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं, और उनके मामले की इस तरह 'आउट-ऑफ-टर्न' लिस्टिंग एक गलत मिसाल कायम करती है। एसोसिएशन ने यह भी रेखांकित किया है कि मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले एक छात्र पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने से जुड़े इस अहम मामले की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को म्यूट (बंद) कर दिया गया था।

पत्र के अनुसार, मीडिया और जनता से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में ऑडियो म्यूट करना गंभीर चिंता का विषय है और किसी विशेष बेंच को मामला सौंपने से न्यायिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास नहीं बढ़ा है।

इस न्यायिक विवाद को खोजी पत्रकार सौरव दास के दावों ने और गहरा कर दिया है। दास ने खुलासा किया कि जिस जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने बिना कोई कारण बताए सुनवाई म्यूट की और मेधा रूपम को हाईकोर्ट के जुर्माने से राहत दी, उसी जज ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले कानून पर भी अपना खंडित फैसला (Split Verdict) सुनाकर मामले को सालों के लिए अटका दिया।

दास के मुताबिक, मात्र दो महीने में रिटायर होने जा रहे जस्टिस शर्मा के बेटे के पास इस समय सरकार के चार बड़े लीगल पैनल (आयकर, जीएसटी, सीमा शुल्क और मध्य प्रदेश सरकार) मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब जज के परिवार पर इतनी सरकारी कृपा हो, तो क्या उनसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है?

इस पूरे विवाद के बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार ने भाजपा की मदद से अकेले ही देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की हत्या की है और उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने खुलासा किया कि राज्यसभा में चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है, जिसमें आवश्यक 50 हस्ताक्षरों के मुकाबले अब 70 से अधिक हस्ताक्षर लंबित हैं।

मोइत्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार को 'सीईसी और ईसी अधिनियम, 2023' की धारा 16 के तहत कानूनी छूट नहीं मिल सकती। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई पुलिस अधिकारी छापेमारी के दौरान सोने का हार चुरा लेता है, तो उसे यह कहकर छूट नहीं मिल सकती कि वह आधिकारिक ड्यूटी पर था।

मोइत्रा के अनुसार, चुनाव आयुक्त ने अन्य दो आयुक्तों की सहमति के बिना एक 'दुष्ट एजेंट' की तरह काम किया है, जिसका प्रमाण यह है कि पिछले 10 महीनों में अन्य दो आयुक्तों ने 14 मौकों पर अपनी असहमति दर्ज कराई है।

टीएमसी सांसद ने चुनाव आयोग पर करोड़ों मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म 6 में अवैध संशोधन और सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण के जरिए बंगाल के 33 लाख वैध मतदाताओं समेत देशभर के करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए। मोइत्रा ने इस प्रक्रिया को चोरी बताते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

अपने बयान के अंत में महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार को एक बेहद गंभीर और खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में दोषपूर्ण मतदाता सूची के आधार पर चुनाव हुए हैं, वहां जनवरी 2025 की सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सिस्टम को ठीक नहीं किया गया, तो देश में एक बड़ी क्रांति होगी। मोइत्रा ने कहा कि जिस दिन देश के 13 करोड़ और बंगाल के 27 लाख हटाए गए मतदाता न्याय मांगने सड़कों पर उतरेंगे, उस दिन सरकार को छिपने की जगह नहीं मिलेगी।

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