प्रचंड गर्मी, न अन्न, न जल: 'मराठा कोटे' की मांग को लेकर 30 मई से मनोज जरांगे पाटिल करेंगे अनशन

मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र की मांग को लेकर 30 मई से जालना में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे मनोज जरांगे पाटिल, महाराष्ट्र सरकार को दी आर-पार की चेतावनी।
Manoj Jarange Patil
मनोज जरांगे पाटिलफोटो साभार- इंटरनेट
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नई दिल्ली: मराठा आरक्षण के प्रबल समर्थक और कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। गुरुवार, 28 मई 2026 को उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 30 मई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में होने वाला यह अनशन भीषण गर्मी के बीच बिना अन्न, जल और आश्रय के होगा। जरांगे ने साफ चेतावनी दी है कि इस दौरान यदि उनके स्वास्थ्य को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार की होगी।

उन्होंने सरकार के ढुलमुल रवैये पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। जरांगे का कहना है कि सरकार को आरक्षण लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है। उनका संकल्प स्पष्ट है, या तो इस बार उनके प्राण जाएंगे या फिर सरकार को ठोस कदम उठाने ही पड़ेंगे।

यह पूरा विवाद मराठा समुदाय को कुनबी जाति के प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी से जुड़ा है। कुनबी वर्ग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण मिलता है, जिससे मराठों को भी कोटे का लाभ मिल सकेगा।

जरांगे ने याद दिलाया कि अगस्त 2023 के मुंबई प्रदर्शन के दौरान सरकार ने एक महीने के भीतर सतारा गजट लागू करने का वादा किया था। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि इस आश्वासन को 10 महीने बीत चुके हैं, आखिर उन्हें और कितना इंतजार करना चाहिए।

कार्यकर्ता ने इस बात पर भी कड़े सवाल उठाए कि हैदराबाद गजट से कुनबी पूर्वजों को सत्यापित करने वाली 58 लाख प्रविष्टियां एकत्र की जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक प्रमाण पत्र क्यों नहीं बांटे गए। उन्होंने जारी किए गए प्रमाणपत्रों के सत्यापन और सतारा गजट की प्रविष्टियों पर की गई कार्रवाई का भी हिसाब मांगा है।

मनोज जरांगे की मांगों की सूची केवल यहीं तक सीमित नहीं है। वे संदीप शिंदे समिति का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि कुनबी रिकॉर्ड्स की गहराई से खोज की जा सके। इसके अलावा, मराठा आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों की वापसी और इस आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

प्रमाणपत्रों में आ रही खामियों ने छात्रों की परेशानी भी बढ़ा दी है। जरांगे ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इन विसंगतियों के कारण मराठा छात्रों को स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में इस बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड ने जरांगे से मुलाकात की थी। हालांकि, यह बातचीत पूरी तरह विफल रही, जिसके बाद राज्यव्यापी आंदोलन की यह नई घोषणा सामने आई।

जरांगे ने सरकारी नुमाइंदों पर उन्हें दरकिनार करने का आरोप लगाया है। प्रसाद लाड के उस बयान पर भी जरांगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि एक गैर-मराठा मुख्यमंत्री ने मराठा आरक्षण दिया है। इसके जवाब में जरांगे ने पलटवार करते हुए कहा कि नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि मराठों ने ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया है।

अपनी बात खत्म करते हुए जरांगे ने मौजूदा ओबीसी आरक्षण को फर्जी और धोखाधड़ी करार दिया। उनका आरोप है कि नेताओं ने सिर्फ अपना वोट बैंक खिसकने के डर से यह आरक्षण बांटा है। उन्होंने सवाल किया कि जब 180 ओबीसी जातियों की सूची में आसानी से उप-जातियां जोड़ दी गईं, तो समान उपनाम और खून का रिश्ता रखने वाले मराठों को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है।

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