KWOHR  ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, महिला अधिकार समूहों, सिविल सोसाइटी, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र और न्याय के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई करें।
KWOHR ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, महिला अधिकार समूहों, सिविल सोसाइटी, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र और न्याय के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई करें।सोशल मीडिया

मणिपुर हिंसा: गैंगरेप के 2.7 साल बाद 'शौर्या'ने हारी जिंदगी! KWOHR की मांग: कूकी-ज़ो महिलाओं पर यौन अत्याचार को Crimes against Humanity मानो

KWOHR के अनुसार, शौर्या की मौत सिर्फ एक जिंदगी का अंत नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता का काला अध्याय है। राज्य की उदासीनता और अपराधियों को मिलने वाली छूट ने न्याय को पूरी तरह नाकाम कर दिया। हमले के तुरंत बाद जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी और जुलाई 2023 में मामला सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन आज तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
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इम्फाल- मणिपुर की 2023 की जातीय हिंसा के गहरे घावों को उजागर करते हुए, कूकी महिला मानवाधिकार संगठन ( Kuki Women Organisation for Human Rights KWOHR ) ने एक युवा कूकी-ज़ो महिला की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख जताया है। केडब्ल्यूओएचआर ने सोमवार को एक बयान जारी कर इस घटना को राज्य की उदासीनता और न्याय व्यवस्था की नाकामी का प्रतीक बताया। शौर्या (बदला हुआ नाम) को 15 मई 2023 को इम्फाल में हथियारबंद लोगों ने अगवा कर लिया था। उन्होंने उसके साथ क्रूर मारपीट की, कई बार बलात्कार किया और उसे मरा हुआ छोड़ दिया। इसके बाद दो साल से ज्यादा समय तक माया ने भयानक शारीरिक दर्द, गहरी मानसिक पीड़ा, बार-बार होने वाले मेडिकल उपचार और लगातार डर का सामना किया। 10 जनवरी को वह उन चोटों और आघात से जुड़ी लंबी बीमारी से चल बसी।

KWOHR के अनुसार, शौर्या की मौत सिर्फ एक जिंदगी का अंत नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता का काला अध्याय है। राज्य की उदासीनता और अपराधियों को मिलने वाली छूट ने न्याय को पूरी तरह नाकाम कर दिया। हमले के तुरंत बाद जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी और जुलाई 2023 में मामला सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन आज तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

इस देरी ने शौर्या को न्याय, सम्मान और जीने का हक छीन लिया। संगठन ने भारत सरकार, मणिपुर राज्य प्रशासन और जांच एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने शौर्या जैसे निसहाय महिलाओं की रक्षा करने, समय पर न्याय देने और पीड़ितों के लिए देखभाल सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रहने का आरोप लगाया। इस चुप्पी, देरी और जवाबदेही की कमी ने अपराधियों को और हौसला दिया है, जिससे कूकी-ज़ो महिलाओं पर हिंसा और बढ़ी है।

वाल ऑफ़ रेमेमब्रेन्स पर शौर्या को श्रद्धांजलि देते समुदाय के सदस्य
वाल ऑफ़ रेमेमब्रेन्स पर शौर्या को श्रद्धांजलि देते समुदाय के सदस्य सोशल मीडिया

मणिपुर में 2023 की हिंसा, जिसमें मैती और कूकी-ज़ो समुदायों के बीच झड़पें हुईं, ने कई महिलाओं को निशाना बनाया। KWOHR ने शौर्या पर हुए क्रूर यौन हिंसा, कूकी-ज़ो महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले हथियारबंद गुटों को मिलने वाली छूट, जांच और मुकदमे में लंबी देरी तथा पीड़ितों को न्याय, सुरक्षा और पुनर्वास न देने की कड़ी निंदा की। संगठन का कहना है कि शौर्या ने अपनी आखिरी सांस तक न्याय की प्रतीक्षा की, लेकिन राष्ट्र ने उसे धोखा दिया।

इस दर्द को कम करने के लिए KWOHR ने तत्काल कदम उठाने की मांग की है। अपने पत्र में संगठन ने लिखा कि सबसे पहले, शौर्या के अपहरण, बलात्कार और हत्या के प्रयास में शामिल सभी अपराधियों की गिरफ्तारी और सख्त मुकदमा चलाने की जरूरत है। साथ ही सीबीआई जांच को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना चाहिए। संगठन की मुख्य मांग है कि मणिपुर संघर्ष के दौरान कूकी-ज़ो महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किया जाए। इससे इन अपराधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलेगी और दोषियों को सजा सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजा, लंबे समय का पुनर्वास और पूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान की जाए। मणिपुर हिंसा से जुड़े सभी यौन हिंसा मामलों की स्वतंत्र न्यायिक निगरानी भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी नाकामियां न हों।

KWOHR ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, महिला अधिकार समूहों, सिविल सोसाइटी, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र और न्याय के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई करें। संगठन का मानना है कि ऐसी गंभीर घटनाओं की अनदेखी न्याय को और कमजोर करती है और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं पर हिंसा को बढ़ावा देती है। शौर्या की आवाज को बुलंद करने, उसके सम्मान को वापस लाने और न्याय दिलाने के लिए केडब्ल्यूओएचआर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। जैसा कि बयान में कहा गया है, "न्याय में देरी न्याय का इंकार है। न्याय का इंकार अब एक जिंदगी ले चुका है।"

KWOHR  ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, महिला अधिकार समूहों, सिविल सोसाइटी, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र और न्याय के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई करें।
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KWOHR  ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, महिला अधिकार समूहों, सिविल सोसाइटी, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र और न्याय के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई करें।
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