MP: ग्वालियर में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास, गवाही से मुकरी पीड़िता साक्ष्यों के आधार पर पाक्सो में मिली सजा

न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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भोपाल। नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एकादशम अपर सत्र विशेष न्यायालय (पाक्सो एक्ट) ग्वालियर के न्यायाधीश तरुण सिंह ने आरोपित रिंकू वाल्मीक पुत्र रतीराम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का सश्रम कारावास अतिरिक्त रूप से भुगतना होगा।

न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं और नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार पर पड़े दीर्घकालिक शारीरिक व मानसिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गवाहों के पलटने के बावजूद दोष सिद्ध

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती तब सामने आई, जब पीड़िता और उसकी मां अपने प्रारंभिक बयानों से मुकर गईं। हालांकि, न्यायालय ने थाना सिरोल पुलिस द्वारा संकलित ठोस साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य तथ्यों, मेडिकल एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपित के विरुद्ध अपराध संदेह से परे सिद्ध होता है।

विशेष लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी

इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रसन्न यादव ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि पीड़िता के बयान से मुकरने के पीछे सामाजिक दबाव और भय की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, ऐसे में संकलित साक्ष्यों का महत्व और बढ़ जाता है।

पीड़िता को मिलेगा दो लाख रुपये का प्रतिकर

न्यायाधीश ने फैसले में पीड़िता की मनोवैज्ञानिक स्थिति, उसके भविष्य पर पड़े दुष्प्रभाव और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए कि पीड़िता को नियमानुसार प्रतिकर स्वरूप दो लाख रुपये की राशि प्रदान की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिकर का उद्देश्य पीड़िता के पुनर्वास और उपचार में सहायक होना चाहिए।

सजा वारंट तैयार, जेल भेजा गया दोषी

सजा सुनाए जाने के बाद आरोपित का सजा वारंट तैयार किया गया और उसे दंड भुगतने के लिए केंद्रीय जेल ग्वालियर भेज दिया गया।

क्या थी घटना?

प्रकरण की शुरुआत 27 मई 2025 को हुई थी। फरियादिया जो निवासी घाटीगांव एवं वर्तमान निवासी थाना सिरोल क्षेत्र, ग्वालियर ने थाना सिरोल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने बताया कि दोपहर के समय उसकी नाबालिग बेटी और बेटा बाहर खेल रहे थे। कुछ समय बाद बेटी दिखाई नहीं दी, जिस पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।

तलाश के दौरान पड़ोस में रहने वाले रिंकू वाल्मीक के घर में झांककर देखा गया, जहां बच्ची उसके साथ मौजूद मिली। जब मां ने बेटी से पूछताछ की तो उसने बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और पाक्सो एक्ट के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।

न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों की मजबूती और अपराध की प्रकृति के आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पीड़ितों को न्याय और समाज को सुरक्षा का भरोसा मिल सके।

NCRB के आंकड़ों में स्थिति भयाभय

मध्य प्रदेश लंबे समय से महिलाओं के खिलाफ अपराधों, खासकर दुष्कर्म के मामलों में देशभर में चर्चा का विषय बना रहा है। वर्ष 2023 में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही। एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश दुष्कर्म की घटनाओं में देशभर में तीसरे स्थान पर रहा। यहां एक साल के भीतर 2,979 मामले दर्ज हुए। राजस्थान 5,078 घटनाओं के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में 3,516 मामले सामने आए।

यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालाँकि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं और हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका असर बहुत कम दिखाई दे रहा है।

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