
भोपाल। इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। इसी कड़ी में इंदौर से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित महू (अंबेडकर नगर) में भी हालात गंभीर हो गए हैं। यहां दूषित पानी की वजह से 30 लोग बीमार हैं, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पत्ती बाजार क्षेत्र के चंदर मार्ग में एक दो मंजिला मकान को ही अस्थायी अस्पताल में तब्दील करना पड़ा है।
महू छावनी क्षेत्र में पानी की सप्लाई और साफ-सफाई की जिम्मेदारी छावनी परिषद महू की है। यहां प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य नगर पालिका से अलग होती है और कई नियम सेना से जुड़े होते हैं। बीमारी फैलने के बाद से पूरा प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सतर्कता बहुत देर से दिखाई दी।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें बस्ती में लगातार अनाउंसमेंट कर रही हैं। लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर समझा रही हैं कि बड़े कुकर में कम से कम दो सीटी आने तक पानी उबालें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकती है।
चंदर मार्ग की एक गली में ट्यूबवेल से आने वाली पानी की सप्लाई पाइपलाइन नाली के भीतर से गुजर रही थी। इसी पाइपलाइन में लीकेज हो गया, जिसके चलते नाली का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलकर घरों तक पहुंचता रहा। स्थानीय रहवासियों के अनुसार यह पाइपलाइन करीब 10 साल पुरानी है और इतने वर्षों में इसका नियमित रखरखाव नहीं किया गया। इसी लापरवाही का खामियाजा आज पूरा मोहल्ला भुगत रहा है।
बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
बीमार बच्चों में पार्थ मुकाती (10), दिव्या चौहान (10), यथार्थ मुकाती (10), पूर्वीश अरुण वर्मा (9) जैसे कई नाम शामिल हैं, जिन्हें पीलिया और टाइफाइड के लक्षणों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार दूषित पानी से होने वाली बीमारियों ने बच्चों को सबसे ज्यादा चपेट में लिया है।
करीब दो से ढाई हजार की आबादी वाले पत्ती बाजार इलाके में कई जगह सड़कें खोद दी गई हैं, ताकि लीकेज ढूंढा जा सके। चारों तरफ गंदगी और बदबू फैली हुई है। इसी बीच लता देवी बताती हैं कि उनका पोता पिछले 15 दिनों से बीमार है और जांच में पीलिया की पुष्टि हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले फूड पॉइजनिंग के मामले सामने आए, फिर बच्चों में टाइफाइड और अब पीलिया फैलता चला गया।
जब गड्ढा भर गया बदबूदार पीले पानी से
गली के चौराहे पर जब पानी की सप्लाई चालू होने वाली थी, उसी वक्त लीकेज वाली जगह से बदबूदार पीला पानी बहने लगा। कुछ ही मिनटों में पूरा गड्ढा उस गंदे पानी से भर गया। बदबू इतनी तेज थी कि वहां खड़ा होना मुश्किल हो गया। मौके पर मौजूद छावनी परिषद और पीएचई विभाग के अधिकारियों ने तुरंत सैंपल लेने के निर्देश दिए और पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। बाद में पाइप बदलने का काम शुरू हुआ।
प्रशासन मौके पर, लेकिन सवाल बरकरार
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, एसडीएम राकेश परमार, तहसीलदार विवेक सोनी, सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी और कैंट बोर्ड सीईओ विकास कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घर-घर जाकर लोगों से बात की और अस्थायी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी क्षेत्र का निरीक्षण किया।
15 दिन से शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
स्थानीय निवासी फिरोज खान ने एक स्थानीय समाचार पत्र को बताया, कि उन्होंने पिछले चार महीनों में तीन बार ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी पानी को पीते-पीते उनकी बेटी पीलिया की चपेट में आ गई। मानव संदल बताते हैं कि 13-14 जनवरी से पानी में बदबू आ रही थी, उबालने पर भी हालत वही रहती थी। पहले उनके बेटे को टाइफाइड हुआ और अब पीलिया का इलाज चल रहा है।
हर तरफ गंदगी, लोगों में गुस्सा
रहवासी विक्की चावरे, सुधीर चौहान और कांग्रेस नेता अमित अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नालियों से गुजर रही नर्मदा जल आपूर्ति पाइपलाइन की शिकायत कई बार की गई, लेकिन छावनी परिषद ने ध्यान नहीं दिया। अब बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं और मोहल्ले के लोग कैम्पर से पानी पीने को मजबूर हैं।
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