मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ केलारस गांव में शनिवार को एक दलित सरपंच को उनके ही घर से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया। आरोप है कि करीब 20 से 25 लोगों की भीड़, जिन्हें जातिवादी तत्व बताया जा रहा है, ने सरपंच का अपहरण किया और उनके साथ जमकर मारपीट की।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब दलित कार्यकर्ता और आजाद समाज पार्टी के संस्थापक सुनील अस्तेय ने इससे जुड़ा एक वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा किया। भीम आर्मी के पूर्व प्रदेश प्रभारी रह चुके अस्तेय ने इस घटना को संविधान, सामाजिक न्याय और दलित प्रतिनिधित्व पर हमला बताया है।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने शनिवार को सरपंच के घर पर धावा बोल दिया। 20-25 लोगों की यह भीड़ सरपंच को जबरन उठाकर पास के ही एक गांव में ले गई। आरोप है कि वहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; पिटाई के बाद हमलावर उन्हें वापस उनके घर ले आए, कमरे में बंद कर दिया और पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से फरार हो गए।
इस बर्बर हमले में सरपंच को गंभीर चोटें आई हैं और फिलहाल उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में सरपंच का परिवार और ग्रामीण स्थानीय पुलिस थाने के बाहर जमा होकर तत्काल कार्रवाई की मांग करते नजर आ रहे हैं। पीड़ित परिवार ने इस हमले के पीछे किसी पुराने वित्तीय विवाद (पैसे के लेन-देन) की आशंका जताई है, हालांकि अभी तक इस कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को क्षेत्र में जातिगत हिंसा के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताते हुए पुलिस से सख्त एक्शन की मांग की है। सुनील अस्तेय ने सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुरैना पुलिस अधीक्षक (SP) को टैग करते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
अस्तेय ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब एक चुना हुआ दलित जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है, तो आम दलित नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
फिलहाल, पुलिस अधिकारियों की ओर से जांच को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से ग्रामीणों में रोष बना हुआ है।
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