दिल्ली का दशहरा: एक तरफ कॉकरोच, दूसरी तरफ मोदी | रावण दहन बना राजनीतिक हथियार

एक तरफ दशहरे के दिन पीतमपुरा में भाजपा विधायक की अगुवाई वाली रामलीला समिति ने कॉकरोच का पुतला लगाया है, तो दूसरी तरफ ही NSUI कार्यकर्ताओं ने रायसीना रोड स्थित अपने मुख्यालय पर रावण के दस शीशों पर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, CEC ज्ञानेश कुमार सहित सहयोगियों के चित्र चिपकाकर पुतला दहन किया।
दशहरा महज धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, यह सियासी संदेश देने का नया हथियार बन चुका है।
आज दिल्ली में एक तरफ पीतमपुरा में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ कॉकरोच का पुतला लगाया गया है, वहीं दूसरी तरफ NSUI द्वारा मोदी समेत नेताओं के चित्र वाला रावण पुतला जलाया गया। रावण दहन धीरे-धीरे धार्मिक परंपरा से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बनता जा रहा है।AI निर्मित सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली- विजयदशमी के अवसर पर दिल्ली के पीतमपुरा स्थित नेताजी सुभाष प्लेस मैदान में श्री केशव रामलीला समिति रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जला रही है। इस फैसले पर आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली इकाई अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजकर FIR दर्ज करने की मांग की है।

श्री केशव रामलीला समिति पीतमपुरा में हर साल रामलीला और रावण दहन का आयोजन करती है। इस बार समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के अलावा चौथा पुतला कॉकरोच का तैयार कराया है, जिसकी ऊंचाई करीब 30 फुट बताई जा रही है। कई मीडिया संस्थानों ने NSP मैदान से पुतले की तैयारियों के विजुअल्स जारी किए हैं।

समिति के अध्यक्ष और मॉडल टाउन से भाजपा विधायक अशोक गोयल का कहना है कि कॉकरोच गंदगी और मैल का प्रतीक है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' से पुतले के कनेक्शन पर गोयल ने साफ़ इनकार किया और कहा, "यह 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या है? यह तो कोई रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी भी नहीं है। हम इसे इतनी अहमियत क्यों दें? हर विजयादशमी पर पुतले जलाना असत्य पर सत्य की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। इसीलिए हमने कॉकरोच को चुना। यह गंदगी का प्रतीक है - चाहे वह सामाजिक गंदगी हो, राजनीतिक गंदगी हो, या किसी और तरह की गंदगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला राजनीतिक नहीं है, बल्कि ‘स्वच्छ भारत’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ अभियान का हिस्सा है। उनका दावा है कि हर साल समिति बुराई के प्रतीक के रूप में एक अतिरिक्त पुतला जलाती रही है। पिछले वर्षों में नक्सलवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों के पुतले जलाए गए थे। इस साल गंदगी को खत्म करने का संदेश देने के लिए कॉकरोच चुना गया है। गोयल के अनुसार, कॉकरोच को रावण की सेना के असुरों में भी शामिल दिखाया जाएगा।

AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज की LG और पुलिस कमिश्नर को शिकायत

AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजी है। शिकायत श्री केशव रामलीला समिति के आयोजकों के खिलाफ है, जिसमें समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का नाम शामिल है।

भारद्वाज का आरोप है कि यह कदम जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने, हिंदू परंपराओं को बदलने और समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास है। उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की भी मांग की है। भारद्वाज ने FIR दर्ज कराने की मांग की है और कहा है कि अगर FIR नहीं हुई तो वे अदालत का रुख करेंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपा के विधायक और मंत्री उनकी हिंदू आस्था का इस्तेमाल सस्ती राजनीति के लिए नहीं कर सकते और हजारों साल पुरानी सनातन परंपराओं का मजाक नहीं बना सकते। उन्होंने आरएसएस से भी इस पर बोलने की अपील की।

आपको बता दें, यह विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। CJP युवाओं का एक आंदोलन है, जिसने पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किए थे और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। उधर, समिति ने किसी भी राजनीतिक संदेश से इनकार किया है। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस घटना पर ‘फ्री पब्लिसिटी’ का जवाब दिया है। दिपके ने कॉकरोच पुतले के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक पोस्ट में कहा, "मुफ्त प्रचार के लिए धन्यवाद।"

दशहरा महज धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, यह सियासी संदेश देने का नया हथियार बन चुका है।

इधर, दशहरे के दिन, NSUI सदस्यों ने 'वोट चोरों' के विरोध में और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए, नई दिल्ली के 5 रायसीना रोड स्थित NSUI मुख्यालय में रावण के दस शीशों में नरेंद्र मोदी, अमित शाह, CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा आदित्यनाथ योगी, गौतम अडानी, मोहन भागवत आदि के चित्र लगाकर पुतला जलाया। संगठन ने इसे 'इस युग के रावण' का प्रतीक बताया। NSUI ने इस विरोध प्रदर्शन को "उंगली तो उठेगी–रावण दहन" नाम दिया।

इस प्रदर्शन के दौरान NSUI ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर 'वोट चोरी' और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। दिल्ली के साथ-साथ लखनऊ में भी यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर मुख्य चुनाव आयुक्त की तस्वीर लगाकर पुतला फूंका गया।

दोनों घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि अब दशहरा महज धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, यह सियासी संदेश देने का नया हथियार बन चुका है।

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