
नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को चारों नए लेबर कोड्स (श्रम संहिताओं) के पूर्ण रूप से लागू होने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। पार्टी का आरोप है कि यह कदम आजादी के बाद से अब तक श्रमिकों के अधिकारों पर सबसे बड़ा प्रहार है, जिससे रोजगार की सुरक्षा और यूनियन बनाने के अधिकार काफी कमजोर हो जाएंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बयान जारी कर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने चिरपरिचित कायरतापूर्ण अंदाज में काम करते हुए इन नियमों को लागू करने के लिए विधानसभा चुनावों के खत्म होने का इंतजार किया। इसके बाद 8 और 9 मई को गजट नोटिफिकेशन के जरिए लेबर कोड्स के अंतिम नियम अधिसूचित कर दिए गए।
खरगे ने इन नए कानूनों को पूरी तरह से 'मजदूर विरोधी' करार दिया। उनका कहना है कि करोड़ों भारतीय श्रमिकों के लिए ये संहिताएं 'हायर एंड फायर' (जब चाहे नौकरी पर रखना और निकाल देना) की नीति, ठेका मजदूरी और यूनियन बनाने के सीमित अधिकारों वाला अंधकारमय भविष्य लेकर आई हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इन संहिताओं का मसौदा बिना किसी विचार-विमर्श के तैयार और लागू किया गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि साल 2015 के बाद से अब तक सरकार द्वारा एक बार भी 'भारतीय श्रम सम्मेलन' (इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस) नहीं बुलाया गया है।
उनके मुताबिक, ये लेबर कोड केवल प्रधानमंत्री के कुछ उद्योगपति मित्रों को ही फायदा पहुंचाएंगे। उन्होंने इसे स्वतंत्रता के बाद से मजदूरों के हितों और उनके अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका बताया है।
खरगे ने 'श्रमिक न्याय' एजेंडे के प्रति कांग्रेस की पांच सूत्रीय प्रतिबद्धता भी दोहराई। इसमें मनरेगा की बहाली और इसे शहरी क्षेत्रों तक बढ़ाना, 400 रुपये प्रतिदिन का राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन और 'राइट टू हेल्थ' कानून के तहत 25 लाख रुपये तक का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज शामिल है। इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए जीवन और दुर्घटना बीमा जैसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपाय भी इस एजेंडे का अहम हिस्सा हैं।
उन्होंने मुख्य सरकारी कार्यों में 'ठेका प्रथा' को रोकने का भी वादा किया। साथ ही, मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों को कमजोर किए जाने के मामले की विस्तृत समीक्षा करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
गौरतलब है कि केंद्र ने हाल ही में आधिकारिक गजट में अंतिम नियमों को प्रकाशित करके चारों लेबर कोड्स को लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। ये चार कोड 21 नवंबर, 2025 से प्रभाव में आ चुके हैं। इनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 2020 शामिल हैं।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि इन नए कोड्स का उद्देश्य 29 पुराने श्रम कानूनों को एक आधुनिक और सरल ढांचे में समेकित करना है। सरकार के अनुसार, ये संहिताएं देश के सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें