
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक खौफनाक मामला सामने आया है। ओडिशा की एक 17 वर्षीय आदिवासी नाबालिग को मानव तस्करी का शिकार बनाकर दो बार बेचा गया और करीब दो साल तक उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। किसी तरह अपनी जान बचाकर ओडिशा वापस लौटी इस पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
कामाख्यानगर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र मल्लिक ने बताया कि पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने जानकारी दी कि ओडिशा के ही एक स्थानीय व्यक्ति ने उसे नौकरी का लालच देकर वहां बेच दिया था। पुलिस के अनुसार, इस घिनौने अपराध की शुरुआत करने वाला मुख्य आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, यह खौफनाक सिलसिला दो साल पहले शुरू हुआ था। यह किशोरी अपनी मां की दूसरी शादी के बाद ढेंकनाल जिले के कंकड़ाहाड़ा इलाके में रह रही थी। वहीं के एक स्थानीय व्यक्ति ने उसे भुवनेश्वर में नौकरी दिलाने का सुनहरा सपना दिखाया। रोजगार की तलाश में वह उस व्यक्ति के झांसे में आ गई।
नौकरी दिलाने के बजाय, उस शख्स ने किशोरी और तीन अन्य लड़कियों को उत्तर प्रदेश पहुंचा दिया। वहां झांसी जिले में इन बच्चियों को आशीष यादव नाम के एक व्यक्ति के हवाले कर दिया गया। यहीं से इस मासूम के लिए नर्क का वह दौर शुरू हुआ, जिसकी कल्पना करना भी रोंगटे खड़े कर देता है।
पीड़िता ने अपनी दर्दनाक दास्तां सुनाते हुए बताया कि उसे तीन महीने तक झांसी में आशीष यादव के घर में बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान आशीष और उसके पिता कल्याण यादव ने लगातार उसका शारीरिक शोषण किया। जब वह इस दरिंदगी के कारण गर्भवती हो गई, तो आशीष की मां उर्मिला यादव ने जबरन उसका गर्भपात करवा दिया।
गर्भपात के बाद जुल्म की इंतेहा यहीं नहीं रुकी। इस किशोरी को महज 50,000 रुपये में चंद्रपाल कुशवाहा नाम के व्यक्ति को बेच दिया गया, जो वहां से मात्र 10 किलोमीटर दूर रहता था। पीड़िता के अनुसार, वहां हालात और भी बदतर हो गए। उसे बाहरी दुनिया के किसी भी इंसान से बात करने की सख्त मनाही थी।
किशोरी ने अपनी शिकायत में बताया कि सबसे पहले चंद्रपाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसके बड़े भाई और दो चाचाओं ने भी उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। यह डरावना सिलसिला पूरे दो साल तक चलता रहा।
आखिरकार एक रात इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक वकील मधुर यादव की मदद से वह वहां से भाग निकलने में कामयाब रही। वह किसी तरह झांसी जिला मुख्यालय पहुंची, लेकिन वहां कानून के रखवालों से भी उसे कोई त्वरित न्याय नहीं मिला। पीड़िता का आरोप है कि झांसी पुलिस ने उसकी पूरी आपबीती सुनकर बयान तो दर्ज किया, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे महज एक ट्रेन का टिकट थमाकर वापस ओडिशा भेज दिया।
कामाख्यानगर पहुंचने के बाद किशोरी ने हिम्मत जुटाई और स्थानीय पुलिस का दरवाजा खटखटाया। इंस्पेक्टर मल्लिक ने बताया कि लड़की का बयान दर्ज कर लिया गया है और उसका अनुभव बेहद विचलित करने वाला है।
वहीं, पीड़िता की मदद करने वाले वकील मधुर यादव ने चेतावनी दी है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। उनके मुताबिक, ओडिशा और अन्य कमजोर राज्यों की लड़कियों की झांसी के ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त की जा रही है। यह मामला एक बहुत बड़े गिरोह का महज एक छोटा सा हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, ओडिशा पुलिस मानव तस्करी के इस बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करने और मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है।
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