मणिपुर: विस्थापित मतदाताओं के अधिकार बचाने के लिए चुनाव आयोग की पहल, तैनात होंगे विशेष अधिकारी

मणिपुर में विस्थापित मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग की बड़ी पहल, घर-घर जाकर होगा सत्यापन।
A relief camp in a Kuki-dominated area of ​​Manipur's Churachandpur district, where displaced members of the community have been living for several months. (The photograph is from 2023.)
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के एक कुकी बाहुल्य क्षेत्र का एक राहत शिविर जिसमें समुदाय के विस्थापित लोग कई महीनों से रह रहे हैं. (तस्वीर 2023 की है) फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए विशेष सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (Special AEROs) की तैनाती करने पर विचार कर रहा है। मई 2023 में भड़की हिंसा के बाद से राज्य में हजारों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए थे। अब इन विस्थापित मतदाताओं को मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

आयोग द्वारा इसी महीने घोषित किए गए कार्यक्रम के अनुसार, मणिपुर में यह सघन पुनरीक्षण अभियान शनिवार से शुरू होने जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत बूथ-स्तरीय अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे। मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए सभी पंजीकृत मतदाताओं को गणना फॉर्म भरना अनिवार्य होगा।

इस प्रक्रिया के बाद, निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (EROs) और एईआरओ द्वारा उन मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे जो अपने या अपने माता-पिता के विवरण देकर अपनी पात्रता साबित नहीं कर पाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने चुनाव आयोग को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें विस्थापित लोगों के लिए विशेष एईआरओ नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह व्यवस्था बिल्कुल वैसी ही होगी जैसी 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान राज्य में विशेष सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की तैनाती करके की गई थी।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत, विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों के रखरखाव के लिए ईआरओ और एईआरओ की नियुक्ति की जाती है। चूंकि मणिपुर में हजारों मतदाता अपने मूल विधानसभा क्षेत्रों से दूर राहत शिविरों में रह रहे हैं, इसलिए चुनाव आयोग विशेष अधिकारियों की मदद से उनकी पात्रता तय करने की योजना बना रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 के चुनावों में कुल 18,620 विस्थापित मतदाता वोट डालने के पात्र थे। उस समय चुनाव आयोग ने राहत शिविरों में रहने वालों के लिए 94 विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए थे।

सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 2023 में विस्थापितों की कुल संख्या 62,000 थी, जो अब घटकर लगभग 57,000 रह गई है।

आगामी एसआईआर अभ्यास के लिए लगभग 14,000 से 15,000 पात्र विस्थापित मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम किए जाने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने हाल ही में एसआईआर के तीसरे चरण के कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसकी शुरुआत पिछले साल जून में हुई थी।

यह तीसरा चरण आने वाले कुछ महीनों में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। शनिवार से ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में बूथ-स्तरीय अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन करने के साथ इस अभ्यास की शुरुआत हो जाएगी।

चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो मणिपुर के 2,996 मतदान केंद्रों पर कुल 20.91 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। तय कार्यक्रम के मुताबिक, सभी मतदाताओं को अपना गणना फॉर्म भरने के लिए 28 जून तक का समय दिया जाएगा।

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