
प्रयागराज/बरेली- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (डीएम) रविंद्र कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने याचिकाकर्ता तारिक खान सहित कुछ व्यक्तियों को निजी घर के अंदर नमाज अदा करने से रोका, जो संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने माना कि इन अधिकारियों के कथित कृत्यों से हाईकोर्ट के 27 जनवरी के आदेश का उल्लंघन (flout) हुआ प्रतीत होता है। यह आदेश मरनाथा फुल गोस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में पारित किया गया था।
उसी खंडपीठ ने 27 जनवरी के आदेश में स्पष्ट किया था कि कोई भी नागरिक अपनी निजी संपत्ति के परिसर में धार्मिक प्रार्थना (प्रेयर मीटिंग) करने के लिए किसी भी तरह की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दिए गए बयान को दर्ज किया कि निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना सभा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, यदि प्रार्थना सार्वजनिक सड़क या भूमि पर फैलती है, तो पुलिस को सूचना देनी होगी और आवश्यक अनुमति लेनी होगी।
याचिकाकर्ता तारिक खान के वकील राजेश कुमार गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे रमजान के महीने में निजी परिसर में नमाज अदा करने में कोई बाधा न डालें।
16 जनवरी 2026 को मोहम्मदगंज गांव में रेशमा खान के खाली पड़े निजी घर में कुछ लोग नमाज अदा कर रहे थे। मालकिन ने अनुमति दी थी और नमाज पूरी तरह निजी परिसर तक सीमित थी। पुलिस ने तारिक खान सहित कुछ लोगों को हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया। उन्हें CrPC की धारा 151 (अब BNSS की धारा 170) के तहत चालान किया गया।
27 जनवरी के मरनाथा आदेश के बाद, तारिक खान ने 28 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से और 2 फरवरी को रजिस्टर्ड पोस्ट से डीएम और एसएसपी को आवेदन दिया कि रमजान में उसी निजी परिसर में नमाज के लिए अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मरनाथा आदेश के बावजूद ये आवेदन लंबित रखे गए और कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट में दलील दी गई कि नमाज निजी परिसर तक सीमित है, इसलिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं।
कोर्ट ने राज्य के वकील से निर्देश लेकर तुरंत दोनों अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया। याचिका को 11 मार्च 2026 को टॉप 10 मामलों में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई (coercive proceedings) पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है।
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और निजी संपत्ति पर प्रार्थना के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण है, खासकर जब राज्य में अल्पसंख्यक धार्मिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी हुई है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.