
भोपाल। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में अवैध रूप से संचालित ईंट भट्टों और भट्टा माफियाओं द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति एवं प्रजापति समाज के अधिकारों के हनन का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। द मूकनायक की ग्राउंड रिपोर्ट और इन्वेस्टिगेशन के बाद राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए रायसेन कलेक्टर को पत्र लिखकर सख्त निर्देश दिए हैं। पिछले दिनों द मूकनायक ने इस मामले में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, जिसके बाद आयोग ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने 20 जनवरी 2026 को भेजे रायसेन कलेक्टर को एक पत्र में स्पष्ट कहा है कि जिले में भट्टा माफिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और प्रजापति समाज के लोगों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित कर अवैध ईंट भट्टों का संचालन कर रहे हैं। आयोग ने कलेक्टर से इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने, दोषियों की पहचान करने और जहां आवश्यक हो वहां अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई द मूकनायक द्वारा प्रकाशित उस विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें रायसेन जिले में अवैध ईंट भट्टों के पूरे नेटवर्क को उजागर किया गया था। रिपोर्ट में सामने आया था कि सरकार द्वारा पिछड़ी जाति के प्रजापति समाज को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दी गई दो लाख ईंटों तक उत्पादन की छूट का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।
जांच में पाया गया कि भट्टा माफिया प्रजापति समाज के लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बड़े पैमाने पर ईंटों का वाणिज्यिक उत्पादन कर रहे हैं। जबकि जिन परिवारों के नाम पर यह छूट दी गई है, वे स्वयं भट्टों पर मजदूरी करने को मजबूर हैं।
द मूकनायक की टीम जब रायसेन जिले की मकोडिया पंचायत और भगवानपुर गांव पहुंची, तो खेतों के बीच बड़े-बड़े भट्टे धधकते मिले। ‘एसएस ईंट’ जैसे भट्टों में एक बार में लाखों ईंटें पकाई जा रही थीं। स्थानीय मजदूरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली संचालन बाहरी लोगों के हाथ में है, लेकिन जांच के समय प्रजापति समाज के नाम आगे कर दिए जाते हैं।
इसी तरह सेहतगंज के चोपड़ा गांव में भी बड़े पैमाने पर अवैध भट्टा संचालन की जानकारी सामने आई, जहां ग्रामीणों ने बताया कि हर साल लाखों ईंटों का उत्पादन होता है, जबकि कागजों में अनुमति प्रजापति समाज के नाम पर दिखाई जाती है।
भट्टों पर काम कर रहे प्रजापति समाज के मजदूरों ने बताया कि सरकार की योजना का उन्हें कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा। न उनके पास जमीन है, न संसाधन। वे रोज़ 400 रुपये की मजदूरी कर किसी तरह परिवार चला रहे हैं। छूट और सरकारी संरक्षण का फायदा माफिया उठा रहे हैं, जबकि असली हितग्राही हाशिये पर हैं।
अब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पत्र के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। आयोग ने साफ किया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि अनुसूचित जाति/जनजाति और प्रजापति समाज के लोगों को जानबूझकर उनके अधिकारों से वंचित किया गया है, तो यह केवल अवैध कारोबार नहीं बल्कि सामाजिक अत्याचार की श्रेणी में आएगा।
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