यूपी के विश्वविद्यालयों में धर्मांतरण पर लगेगी रोक: राजभवन ने दिए 'एंटी-रेडिकलाइजेशन सेल' बनाने के सख्त निर्देश

यूपी के विश्वविद्यालयों में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए राजभवन का बड़ा कदम, परिसरों में बनेगी 'एंटी-रेडिकलाइजेशन सेल', छात्रों की सुरक्षा और निगरानी होगी सख्त।
Anti Radicalisation Cell, Religious Conversion
यूपी के विश्वविद्यालयों में जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद रोकने के लिए 'एंटी-रेडिकलाइजेशन सेल' बनाने के सख्त निर्देश।
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब 'जबरन धर्मांतरण' के खिलाफ एक बड़ी पहल शुरू की गई है। शैक्षणिक परिसरों में इस तरह की गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए राजभवन (कुलाधिपति सचिवालय) ने सभी संस्थानों को तत्काल प्रभाव से 'एंटी-रेडिकलाइजेशन सेल' (कट्टरपंथ विरोधी इकाइयां) स्थापित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

यह कड़ा कदम लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पिछले साल दिसंबर में सामने आए एक बहुचर्चित मामले के बाद उठाया गया है। उस दौरान परिसर से एक कथित "लव जिहाद" नेटवर्क संचालित होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को जबरन धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने 29 मई को सभी कुलपतियों और निदेशकों को एक पत्र जारी किया। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों को प्रलोभन देकर या मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर धर्मांतरण कराने के प्रयासों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। परिसरों को सुरक्षित, धर्म-निरपेक्ष और पूरी तरह से शैक्षणिक बनाए रखने के लिए निवारक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है। पत्र में विश्वविद्यालय और संस्थान स्तर पर 'एंटी-रेडिकलाइजेशन' इकाइयों या छात्र कल्याण प्रकोष्ठों को अत्यधिक सक्रिय करने को कहा गया है।

राजभवन के इस पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा और नवाचार के केंद्र नहीं हैं, बल्कि युवाओं के नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास में भी उनकी अहम भूमिका होती है। इसलिए, छात्रों को डराकर, मानसिक दबाव बनाकर या किसी भी अनैतिक लालच के जरिए उनका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास पूरी तरह से गैरकानूनी, अनैतिक और अस्वीकार्य है।

इन निर्देशों के तहत विश्वविद्यालयों को कुछ विशेष रणनीतियां अपनाने को कहा गया है। संस्थानों को मेंटर-मेंटी सत्रों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने और छात्रों को इस विषय के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीए) और अनौपचारिक बातचीत के माध्यम से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी चिंताओं पर करीब से नजर रखने की सलाह दी गई है।

छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों को ऐसे गोपनीय परामर्श केंद्र (काउंसलिंग सेंटर) स्थापित करने होंगे जहां मानसिक दबाव या प्रलोभन का सामना कर रहे छात्र बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इसके साथ ही, हॉस्टल और परिसर के अन्य संवेदनशील स्थानों की निगरानी भी कड़ी की जाएगी। विश्वविद्यालयों को किसी भी बाहरी और अनधिकृत व्यक्ति का प्रवेश वर्जित करने तथा समय-समय पर औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों में तार्किक सोच और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नैतिक मूल्यों पर व्याख्यान और सेमिनार आयोजित करने को भी कहा गया है। यदि कोई भी व्यक्ति, समूह या संगठन धर्मांतरण जैसी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो विश्वविद्यालयों को तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचित करना होगा। ऐसे मामलों में राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जबरन धर्मांतरण को कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा मानती है। हाल के वर्षों में प्रदेश सरकार ने 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम' को काफी सख्त किया है। इस नई पहल के बाद अब विश्वविद्यालय भी छात्रों के बीच ऐसी गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने के इस व्यापक अभियान का केंद्र बन गए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर केजीएमयू के एक वरिष्ठ संकाय सदस्य ने जानकारी दी कि उन्हें राजभवन से ये निर्देश प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल की घटना के बाद ही संस्थान ने इस तरह की शिकायतों को रोकने के लिए एक सेल का गठन कर लिया था, जिसे अब और अधिक सशक्त किया जाएगा। इसी सेल की सतर्कता से परिसर में जबरन धर्मांतरण के दो अन्य मामलों की पहचान की गई थी।

संकाय सदस्य के अनुसार, इन दो मामलों में से एक में एक गैर-चिकित्सक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर छात्राओं को मेडिकल कैंप के बहाने अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रहा था। इन दोनों ही घटनाओं में तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।

इस बीच, लखनऊ की अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी (ABVMU) ने भी राजभवन की इस एडवाइजरी का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने 5 जून को एक पत्र जारी कर अपने सभी संबद्ध सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग व अन्य हेल्थकेयर संस्थानों के प्राचार्यों और निदेशकों को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सभी संबद्ध कॉलेजों को इस मुद्दे को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए परिसरों में एक सुरक्षित और धर्म-निरपेक्ष शैक्षणिक माहौल बनाए रखने को कहा गया है। इसके साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया है कि इन आदेशों के अनुपालन में जो भी कदम उठाए जाएं, उसकी विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी जाए।

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