UGC के नए नियम: समता हेल्पलाइन भेदभाव के खिलाफ छात्रों की 24×7 ढाल, जानिए क्या है और कैसे कर सकेंगे इस्तेमाल?

यदि शिकायतकर्ता अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता है, तो वह शुरुआत में ही गोपनीयता का अनुरोध कर सकता है।
UGC के नए नियम: समता हेल्पलाइन भेदभाव के खिलाफ छात्रों की 24×7 ढाल, जानिए क्या है और कैसे कर सकेंगे इस्तेमाल?
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भोपाल। उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग या किसी भी पहचान के आधार पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करने की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। 13 जनवरी को जारी अधिसूचना के तहत यूजीसी ने ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) नियम, 2026’ को मंजूरी दी है। इन नियमों का केंद्र बिंदु है- समता हेल्पलाइन, जो अब हर उच्च शिक्षा संस्थान में अनिवार्य रूप से स्थापित की जाएगी।

क्या है समता हेल्पलाइन?

समता हेल्पलाइन एक 24×7 सहायता तंत्र है, जिसे उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने या काम करने वाले किसी भी हितधारक, छात्र, शोधार्थी, शिक्षक या कर्मचारी के लिए बनाया गया है। यदि किसी को भेदभाव, उत्पीड़न या असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो वह सीधे इस हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है।

क्या हैं नियम?

  • हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को अपनी स्वतंत्र समता हेल्पलाइन स्थापित करनी होगी।

  • यदि किसी कॉलेज की हेल्पलाइन किसी कारणवश सक्रिय नहीं है, तो उस कॉलेज से जुड़े छात्र और कर्मचारी संबद्ध विश्वविद्यालय की समता हेल्पलाइन का उपयोग कर सकेंगे।

  • यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी, ताकि संकट की घड़ी में तुरंत मदद मिल सके।

किनके लिए है यह हेल्पलाइन?

समता हेल्पलाइन खासतौर पर उन वर्गों के हितों की रक्षा पर केंद्रित है, जो ऐतिहासिक रूप से भेदभाव का शिकार रहे हैं-

अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और दिव्यांगजन। हालांकि, नियम स्पष्ट करते हैं कि किसी भी पहचान के आधार पर भेदभाव झेलने वाला हर व्यक्ति इस हेल्पलाइन का उपयोग कर सकता है।

गोपनीयता की पूरी गारंटी

नए नियमों में गोपनीयता पर विशेष जोर दिया गया है। यदि शिकायतकर्ता चाहता है, तो: उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। बिना अनुमति के उसका नाम या विवरण किसी भी स्तर पर साझा नहीं किया जाएगा। यह प्रावधान इसलिए अहम है क्योंकि अक्सर छात्र डर या दबाव के कारण शिकायत करने से पीछे हट जाते हैं।

समता हेल्पलाइन का उपयोग कैसे करें?

समता हेल्पलाइन का इस्तेमाल करना सरल रखा गया है ताकि कोई भी बिना झिझक मदद मांग सके समता हेल्पलाइन से संपर्क करना पूरी तरह सरल और सुलभ रखा गया है। किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान का छात्र, शोधार्थी, शिक्षक या कर्मचारी संस्थान द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर या डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। संपर्क करने के बाद भेदभाव से जुड़ी घटना का संक्षिप्त, तथ्यात्मक और स्पष्ट विवरण देना होता है। यह जानकारी लिखित रूप में, ई-मेल या ऑनलाइन फॉर्म के जरिए, अथवा मौखिक रूप से फोन कॉल के माध्यम से भी साझा की जा सकती है। नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी विशेष प्रारूप की बाध्यता नहीं होगी, ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना किसी झिझक या तकनीकी अड़चन के अपनी बात रख सके।

गोपनीयता और आगे की कार्रवाई की व्यवस्था

यदि शिकायतकर्ता अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता है, तो वह शुरुआत में ही गोपनीयता का अनुरोध कर सकता है। ऐसे मामलों में समता हेल्पलाइन यह सुनिश्चित करेगी कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित और गोपनीय बनी रहे। शिकायत प्राप्त होने के बाद हेल्पलाइन संबंधित संस्थान के समता प्रकोष्ठ या अधिकृत समिति तक मामला पहुंचाएगी, जहां नियमों के अनुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी के नए नियमों के तहत संस्थानों पर यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे शिकायतों को हल्के में न लें और तय समयसीमा के भीतर निष्पक्ष व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि उच्च शिक्षा परिसर वास्तव में भेदभाव-मुक्त और सुरक्षित बन सकें।

द मूकनायक से बातचीत में भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी.एस. सिंह ने बताया कि फिलहाल समता हेल्पलाइन को लेकर कोई अंतिम प्रारूप तैयार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों के तहत समता हेल्पलाइन को पोर्टल और टोल-फ्री नंबर के माध्यम से संचालित किया जाना प्रस्तावित है, ताकि छात्र, शोधार्थी और कर्मचारी आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। हालांकि, अभी इसकी संरचना और संचालन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन यूजीसी द्वारा जारी नए नियमों का अध्ययन कर रहा है और नियमों के प्रभावी पालन के लिए जल्द ही आंतरिक बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के बाद समता हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली, जिम्मेदार इकाइयों और समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप भेदभाव-मुक्त और समावेशी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बना मजबूत ढांचा

इन नियमों के पीछे सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश भी एक बड़ी वजह रहे हैं। सितंबर 2025 में रोहित वेमुला और पायल ताडवी मामलों की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यूजीसी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ठोस और प्रभावी नियम बनाए जाएं। अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में सिर्फ नीतियां नहीं, बल्कि व्यवहारिक और सुलभ शिकायत तंत्र होना चाहिए, समता हेल्पलाइन उसी का परिणाम है।

क्यों अहम है समता हेल्पलाइन?

समता हेल्पलाइन केवल एक नंबर या औपचारिक व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि यह उन छात्रों और कर्मचारियों के लिए आवाज़ बनने का माध्यम हो सकती है, जो अब तक चुप रहने को मजबूर थे। यह हेल्पलाइन उच्च शिक्षा संस्थानों को यह संदेश भी देती है कि भेदभाव अब “आंतरिक मामला” नहीं, बल्कि जवाबदेही का विषय है।

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