
भोपाल। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय विवाद और संवेदनशील दृश्य का गवाह बन गई, जब सिवनी मालवा तहसील से आए एक पीड़ित परिवार की फरियाद सुनते हुए नगर तहसीलदार सरिता मालवीय का लहजा अचानक सख्त हो गया। सरकारी जमीन पर बने प्रधानमंत्री आवासों से रास्ता और पानी की निकासी बंद होने की शिकायत लेकर पहुंचे दो सगे भाई अपनी मां के साथ अर्धनग्न अवस्था में कलेक्ट्रेट परिसर में ‘राम नाम सत्य है’ के नारे लगाते हुए दिखाई दिए। हाथों में कफन, माला और झांझ लेकर पहुंचे इस परिवार का कहना था कि प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते वे थक चुके हैं, कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही, इसलिए मजबूरी में उन्हें इस तरह प्रदर्शन करना पड़ा।
परिवार की यह हालत देखकर तहसीलदार सरिता मालवीय नाराज हो गईं। उन्होंने ऊंची आवाज में फरियादियों को फटकारते हुए कहा कि यह कलेक्ट्रेट परिसर है, यहां इस तरह का प्रदर्शन और शोर-शराबा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कानून व्यवस्था भंग की गई तो पुलिस बुलाकर सभी को अंदर करवा दिया जाएगा।
तहसीलदार के इस तेवर से परिवार सहम गया। शिकायतकर्ता राजकुमार सराठे और उसकी मां भावुक हो उठे और न्याय की गुहार लगाते हुए तहसीलदार के पैरों में गिर पड़े। रोते-बिलखते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल न्याय चाहते हैं, कई बार शिकायत कर चुके हैं, मामला अपर कलेक्टर कोर्ट में भी चल रहा है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
राजकुमार सराठे ने बताया कि वे जीरावेह गांव के निवासी हैं और उनके खेत से लगी सरकारी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान बना दिए गए हैं। इन निर्माणों के कारण न केवल उनके खेत तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया है, बल्कि पानी की निकासी भी पूरी तरह रुक गई है। बारिश के दिनों में खेत में पानी भर जाता है, फसल बर्बाद हो जाती है और घर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उसकी मां ने रोते हुए कहा कि उन्होंने हर स्तर पर गुहार लगाई, लेकिन कहीं कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ, इसलिए मजबूरी में उन्हें इस तरह कलेक्ट्रेट आना पड़ा।
स्थिति बिगड़ती देख बाद में अधिकारियों का रवैया कुछ नरम पड़ा। एसडीएम जय सोलंकी और तहसीलदार सरिता मालवीय ने युवकों को कपड़े पहनने के लिए कहा और उन्हें शांत कराया। इसके बाद पीड़ित परिवार को जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन के पास ले जाया गया। सीईओ जैन ने पूरे मामले को सुना और जिला स्तर से एक टीम बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही तहसीलदार को सिवनी मालवा जाकर मौके की स्थिति देखने के आदेश भी दिए गए, ताकि रास्ता और पानी निकासी से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
मामले को लेकर तहसीलदार सरिता मालवीय ने अपनी सफाई में कहा कि फरियादी कलेक्ट्रेट परिसर में अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन कर रहे थे और प्रशासन के खिलाफ उल्टा-सीधा बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने और समझाने के लिए उन्हें डांटना पड़ा, उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखना था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब आम लोग न्याय के लिए इस हद तक मजबूर हो जाएं कि उन्हें कफन ओढ़कर प्रशासन के दरवाजे पर आना पड़े, तो व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी जरूर है।
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