
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को आदिवासी समुदाय के बच्चों के आवासीय छात्रावासों में खाद्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान एक मंत्री के जवाब के बाद, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस मामले की गहन जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
सदन में हुई तीखी नोकझोंक
दरअसल, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने छात्रावासों में आपूर्ति की जाने वाली खाद्य सामग्री (राशन) की कीमतों और गुणवत्ता से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया था। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक उनके इस जवाब से असंतुष्ट नजर आए। इसी बात को लेकर सत्ता पक्ष (भाजपा) और विपक्षी सदस्यों के बीच सदन में जमकर बहस और तीखी नोकझोंक हुई।
सदन में हो रहे हंगामे के बीच स्पीकर देवनानी ने मोर्चा संभाला। अलग-अलग छात्रावासों में राशन की खरीद दरों में भारी अंतर पर कांग्रेस विधायकों द्वारा उठाए गए सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया, "इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाएगी।"
बता दें कि इस मुद्दे पर मूल सवाल बांसवाड़ा से विधायक अर्जुन सिंह बामनिया द्वारा पूछा गया था।
'यह आदिवासी बच्चों के निवाले पर डाका है'
सरकार पर हमला बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पिछले दो सालों से सामान्य टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके बजाय, सीधे छात्रावास वार्डनों के बैंक खातों में पैसा जमा किया जा रहा है।
जूली ने आरोप लगाया, "कुछ जगहों पर घी ₹400 प्रति लीटर खरीदा जा रहा है, तो कहीं यही घी ₹800 में आ रहा है। यह सीधे तौर पर आदिवासी बच्चों के भोजन में की जा रही लूट और डाका है।"
उन्होंने कहा कि मंत्री ने इस 'खुली लूट' पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
जांच के लिए समिति गठित
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सदन को बताया कि इन कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन पहले ही कर दिया गया है। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि छात्रावासों को पहले सहकारी उपभोक्ता भंडारों से राशन खरीदने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जब भंडारों ने राशन की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई, तब मजबूरी में खुले बाजार से सामान खरीदा गया।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
कीमतों में अंतर को लेकर कांग्रेस सदस्यों की लगातार बयानबाजी के बीच मंत्री ने जांच समिति का ब्यौरा भी सदन के सामने रखा। खराड़ी ने बताया कि इस समिति में वित्तीय सलाहकार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, लेखा अधिकारी और सहायक लेखा अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि जो भी अधिकारी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, अपने लिखित जवाब में मंत्री खराड़ी ने जानकारी दी कि सरकार द्वारा संचालित इन आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को नियमित रूप से भोजन दिया जा रहा है, जिसमें नाश्ता, फल, दूध, बिस्कुट और चाय शामिल हैं।
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